भुवनेश्वर , फरवरी 22 -- उड़ीसा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति शशिकांत मिश्रा ने कहा है कि भारत का संविधान देशवासियों से व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधियों के सभी क्षेत्रों में उत्कृष्टता की दिशा में प्रयास करने का आग्रह करता है, ताकि राष्ट्र निरंतर प्रयास और उपलब्धि के उच्च स्तर तक पहुँच सकन्यायमूर्ति मिश्रा ने कल यहाँ 'एसओए डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी' के संकाय सदस्यों और छात्रों को 'एसओए व्याख्यान श्रृंखला' में संबोधित करते हुए कहा, "संविधान का पालन करना एक मौलिक कर्तव्य है और न्याय वह इंजन है जो राष्ट्र को चलाता है।"उन्होंने कहा, "संविधान न्याय के साथ शुरू होता है, न्याय के माध्यम से आगे बढ़ता है और न्याय के साथ ही समाप्त होता है।" उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश को अपनी उस सभ्यता पर गर्व होना चाहिए जिसने संविधान सभा के महान सदस्यों के माध्यम से संविधान के मसौदे को प्रभावित किया। उन्होंने कहा कि विशेषज्ञों के संविधान का मसौदा तैयार करने से पहले ही यहाँ ज्ञान, बुद्धि और सभ्यता के लोकाचार का भंडार मौजूद था। उन्होंने कहा कि 'यह कहना गलत होगा कि अंग्रेजों ने हमें कानून सिखाया।'भारतीय जनमानस पर संविधान के प्रभाव का जिक्र करते हुए न्यायमूर्ति मिश्रा ने बहुत समय पहले की एक सर्दियों की रात में नयी दिल्ली के एक ऑटो चालक के साथ अपने अनुभव को साझा किया। उस आटो चालक ने आधी रात को ट्रैफिक लाइट तोड़ने से इनकार कर दिया था, जबकि सड़क पर वाहन बहुत कम थे। उन्होंने बताया, " मैंने उसे आगे बढ़ने के लिए उकसाया क्योंकि मुझे ट्रेन पकड़नी थी, लेकिन वह अपनी जगह से टस से मस नहीं हुआ।"ऑटो चालक ने जवाब दिया, "खुद को अच्छा नहीं लगेगा।" न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा कि उन्होंने एक वकील के रूप में संविधान का अध्ययन किया था, जबकि ऑटो चालक ने कभी भी इसे नहीं पढ़ा था, इसके बावजूद वह इसके प्रावधानों को जी रहा था। उन्होंने कहा कि यह अपने नागरिकों पर भारतीय संविधान के प्रभाव को दर्शाता है।

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