बारां , अप्रैल 28 -- राजस्थान के बारां जिले के अटरू क्षेत्र के ग्राम सुभाषपुरा में हुआ आदिवासी मीणा समाज का विवाह सम्मेलन इस बार एक अनोखी और प्रेरक पहल के चलते सुर्खियों में है।
यह आयोजन पारंपरिक विवाह से अलग हटकर सामाजिक बदलाव और जागरूकता का प्रतीक बन गया, जिसने पूरे क्षेत्र का ध्यान अपनी ओर खींचा। इस महत्वपूर्ण आयोजन की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि दूल्हा-दुल्हन ने सात फेरों के दौरान हाथों में भारतीय संविधान और शहीद भगत सिंह के विचारों की पुस्तक थामे रखी। फेरों को नई सोच के साथ जोड़ते हुए नवदंपती ने समानता, स्वतंत्रता, न्याय, एकता, संघर्ष, सामाजिक जिम्मेदारी और जीवन संकल्प जैसे सात मूल सिद्धांतों पर आधारित वचन लिए।
कार्यक्रम में मौजूद वक्ताओं ने साफ कहा कि वर्तमान दौर में विवाह केवल दो व्यक्तियों का मिलन नहीं, बल्कि दो विचारधाराओं और सामाजिक जिम्मेदारियों का संगम होना चाहिए। संविधान जहां समान अधिकार और न्याय की गारंटी देता है, वहीं भगत सिंह के विचार युवाओं को अन्याय के खिलाफ खड़े होने की प्रेरणा देते हैं।
सम्मेलन में आदिवासी मीणा समाज के गणमान्य लोग, महिलाएं और बड़ी संख्या में युवा शामिल हुए। पूरे आयोजन में सामाजिक चेतना, शिक्षा और एकता का माहौल देखने को मिला, जिसने इसे एक सामान्य विवाह से अलग पहचान दी।
इस पहल ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि विवाह जैसे पारंपरिक आयोजन को भी सामाजिक परिवर्तन और जागरूकता का सशक्त माध्यम बनाया जा सकता है। कार्यक्रम के अंत में नवदंपती ने संविधान को जीवन का मार्गदर्शक और भगत सिंह को प्रेरणा मानते हुए साथ निभाने का संकल्प लिया।
आयोजन समिति के प्रमुख चेतन सत्तावन ने अतिथियों, समाजजनों और सहयोगकर्ताओं का आभार व्यक्त किया। सुभाषपुरा का यह आयोजन अब क्षेत्र में एक नई मिसाल बन गया है, जो आने वाले समय में विवाह की परंपराओं को नई दिशा दे सकता है।
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