रांची , सितंबर 24 -- झारखंड के भाकपा माले के राज्य सचिव मनोज भक्त ने राज्य कमिटी की ओर से कहा कि चुनाव आयोग द्वारा की जा रही लीपापोती से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की मनमानी और संवैधानिक जिम्मेदारी के साथ गद्दारी के आरोपों की ही पुष्टि हो रही है।
अन्य दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों को नजरअंदाज करने से साफ है कि ज्ञानेश कुमार अपने पद का इस्तेमाल निहित स्वार्थों और राजनीतिक हितों के लिए कर रहे हैं। ज्ञानेश कुमार का पद पर बने रहना देश और लोकतंत्र के लिए ख़तरनाक है। भाकपा-माले ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की मांग को लेकर सप्ताहव्यापी प्रतिवाद कार्यक्रम चलाएगी।
एसआईआर पर संविधान विशेषज्ञों, पूरे विपक्ष और पूर्व चुनाव आयुक्तों ने पहले भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अब चुनाव आयोग के भीतर और आयोग के बहुमत की असहमति उजागर हो गई है। जाहिर है कि एसआईआर को फौरन रद्द किया जाए। हाल में हुए चुनावों पर उठ रहे सवाल जायज हैं। इसलिए इन चुनावों को रद्द किया जाए। एसआईआर के माध्यम से बनाई गई मतदाता सूचियों के आधार पर कराए गए चुनावों की विश्वसनीयता संदिग्ध है। इसलिए एसआईआर प्रक्रिया के बाद से हुए चुनावों को रद्द कर दिया जाए।
सर्वोच्च न्यायालय से देश की उम्मीदें जुड़ गई हैं। यह देश के संविधान, चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था और लाखों शहीदों की बेशकीमती कुर्बानियों से हासिल आज़ादी में मिले गणतंत्र की रक्षा का सवाल है। भाकपा माले देश के तमाम नागरिकों से अपील करती है कि ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी के पक्ष में अपनी आवाज बुलंद करें।
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