नैनीताल , अगस्त 14 -- उत्तराखंड हाईकोर्ट ने लोक निर्माण विभाग में संविदा पर कार्यरत कनिष्ठ अभियंताओं से जुड़ी 50 से अधिक रिट याचिकाओं के समूह पर महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है।

न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ ने कहा कि जिन याचिकाकर्ताओं का अभी समायोजन नहीं हो सका है, उन्हें उपलब्ध और भविष्य में रिक्त होने वाले पदों पर समायोजित किया जाए। इसके बाद याचिकाकर्ताओं के नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।

मामला उन कनिष्ठ अभियंताओं से संबंधित है, जो लोक निर्माण विभाग में 10 से 15 वर्ष से अधिक समय से संविदा पर कार्यरत हैं। उनकी संविदा नियुक्ति आगे नहीं बढ़ाए जाने के बाद उन्होंने सेवा में वापस लेने और नियमितीकरण की मांग को लेकर उच्च न्यायालय का रुख किया था।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने बताया कि अदालत के अंतरिम आदेशों के आधार पर उपलब्ध 83 पदों पर याचिकाकर्ताओं को समायोजित किया गया। इसके अलावा कनिष्ठ अभियंताओं की सहायक अभियंता पद पर पदोन्नति के बाद उपलब्ध हुए 19 अन्य पदों पर भी समायोजन किया गया। राज्य ने छह अगस्त के निर्देशों के आधार पर बताया कि इस प्रकार कुल 102 याचिकाकर्ताओं को समायोजित किया जा चुका है।

कुछ याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं ने कोर्ट को बताया कि वरिष्ठ होने के बावजूद कुछ याचिकाकर्ता केवल इसलिए समायोजन से बाहर रह गए क्योंकि उनकी याचिकाओं में अंतरिम आदेश बाद में हुआ था अथवा उनके पक्ष में अंतरिम आदेश नहीं था। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अंतरिम आदेश की तारीख को किसी याचिकाकर्ता को समायोजन से वंचित करने का आधार नहीं बनाया जा सकता।

न्यायालय ने कहा कि उपलब्ध पदों के अभाव में जो याचिकाकर्ता छूट गए हैं, उन्हें दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित 10 पदों पर तब तक समायोजित किया जा सकता है, जब तक नियमित रूप से चयनित अभ्यर्थी कार्यभार ग्रहण नहीं कर लेते। इसके साथ ही भविष्य में उपलब्ध होने वाली रिक्तियों पर भी इन याचिकाकर्ताओं को समायोजित करने के निर्देश दिए गए।

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