, Feb. 21 -- रिपोर्ट में कई पीड़ितों के बयान शामिल हैं, जिनमें उन्होंने बताया कि काम का लक्ष्य पूरा न करने पर उन्हें पीटा गया, बिजली के झटके दिये गये, भूखा रखा गया और घंटों तक एकांत कारावास में रखा गया। महिलाओं और लड़कियों के साथ बलात्कार, यौन शोषण और जबरन गर्भपात की घटनाओं का भी उल्लेख किया गया है।
रिपोर्ट में एक थाई पीड़ित के हवाले से बताया गया कि जुर्माना, मारपीट या किसी दूसरे को 'बेचे' जाने से बचने के लिए उसे स्कैम से हर दिन 9,500 डॉलर कमाने पड़ते थे। एक श्रीलंकाई पीड़ित के हवाले से कहा गया है कि लक्ष्य पूरा न करने वालों को 'पानी की जेल' जैसे कंटेनरों में बंद कर दिया जाता था, जहां सांस लेना भी मुश्किल हो जाता था। कई मामलों में पीड़ितों को अपने साथियों पर हिंसा करने के लिए मजबूर किया गया।
रिपोर्ट के मुताबिक, इन स्कैम परिसरों के बड़े केन्द्र कंबोडिया, म्यांमार और लाओस सहित मेकोंग क्षेत्र में स्थित हैं, लेकिन अब यह नेटवर्क दक्षिण एशिया, खाड़ी देशों, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका तक फैल चुका है। उपग्रह चित्रों से पता चलता है कि कुछ परिसर सैकड़ों एकड़ में फैले हुए हैं, जिनमें ऊंची दीवारें, कांटेदार तार और सशस्त्र गार्ड तैनात रहते हैं।
संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि बंगलादेश, चीन, भारत, म्यांमार, श्रीलंका, थाईलैंड, वियतनाम और कई अफ्रीकी देशों के नागरिक इन नेटवर्कों के शिकार बने हैं। रिपोर्ट में चिंता जताई गयी है कि कई देशों में इन पीड़ितों को बचाने के बजाय गिरफ्तार कर लिया जाता है और उन पर ही साइबर अपराध के आरोप लगाये जाते हैं। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख ने कहा कि पीड़ितों को संरक्षण, पुनर्वास और न्याय मिलना चाहिए, न कि सजा।
रिपोर्ट में देशों से संगठित अपराध नेटवर्क के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई, सीमा-पार सहयोग बढ़ाने, भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई और पीड़ित-केंद्रित सहायता प्रणालियां विकसित करने की अपील की गयी है। संयुक्त राष्ट्र ने आगाह किया कि यदि तत्काल और समन्वित वैश्विक कदम नहीं उठाए गये, तो ये स्कैम नेटवर्क और अधिक फैलेंगे और लाखों लोगों के जीवन को बर्बाद करते रहेंगे।
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