जेनेवा/न्यूयॉर्क , फरवरी 07 -- संयुक्त राष्ट्र ने उन रिपोर्टों पर गंभीर चिंता व्यक्त की है, जिनमें कहा गया है कि इजरायली सेना ने एक फरवरी को लेबनान और इजरायल को अलग करने वाली 'ब्लू लाइन' के समीप एक अत्यंत जहरीले खरपतवारनाशक का छिड़काव किया है। जेनेवा में मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि इस घटना ने वहां रहने वाले आम नागरिकों के लिए 'गंभीर मानवीय खतरा' उत्पन्न कर दिया है।
संयुक्त राष्ट्र सूचना सेवा की निदेशक एलेजेंड्रा वेलुची ने कहा कि कृषि भूमि पर ऐसे रसायनों के उपयोग से स्थानीय पारिस्थितिकी पर जो प्रभाव पड़ेगा, वह भविष्य में नागरिकों की अपने घरों और आजीविका की ओर वापसी पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत सभी पक्षों की जिम्मेदारियों पर जोर देते हुए स्पष्ट किया कि 'ब्लू लाइन' के उत्तर में इजरायल रक्षा बल की कोई भी गतिविधि सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1701 का सीधा उल्लंघन है।
लेबनान के अधिकारियों की प्रारंभिक रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि छिड़काव किया गया रसायन 'ग्लाइफोसेट' है। प्रभावित क्षेत्रों से लिए गए नमूनों की जांच में रसायन की मात्रा निर्धारित सीमा से 20 से 30 गुना अधिक पाई गई है। कार्यालय के प्रवक्ता थमीन अल-खितान ने कहा कि इस्तेमाल किए गए रासायनिक पदार्थों की प्रकृति की पुष्टि के लिए गहन जांच आवश्यक है, क्योंकि कृषि भूमि और जल स्रोतों को लक्षित करना गंभीर खतरा पैदा करता है।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार अधिकारियों ने कब्जे वाले वेस्ट बैंक (पश्चिमी तट) के घटनाक्रमों पर भी गहरी चिंता व्यक्त करते हुए चेतावनी दी कि इजरायल के नए सैन्य अभियान और बस्तियों का विस्तार एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी देश की संभावनाओं को कमजोर कर रहा है। गौरतलब है कि पिछले वर्ष से पूरे पश्चिमी तट से हजारों फिलिस्तीनियों को जबरन विस्थापित किया गया है, जिससे क्षेत्र में मानवीय संकट और गहरा गया है।
इजरायल के सैन्यीकृत 'आयरन वॉल' अभियान ने विशेष रूप से तीन शरणार्थी शिविरों जेनिन, तुलकर्म और नूर शम्स को प्रभावित किया है, जहाँ से 32,000 से अधिक लोगों को उजाड़ दिया गया है। श्री अल-खितान ने बताया कि कई लोगों के घर इजरायली बलों द्वारा नष्ट कर दिए गए हैं, जिसके कारण विस्थापित लोग अब भी अपने घरों को लौटने में असमर्थ हैं और बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, इजरायल के सुरक्षा अभियानों में अब पूर्वी यरुशलम के समुदायों को भी निशाना बनाया जा रहा है। हाल ही में शुअफत शरणार्थी शिविर में दुकानों और घरों पर छापे मारकर दर्जनों लोगों को हिरासत में लिया गया और उनकी संपत्तियां जब्त की गईं। इसके अतिरिक्त, कफ्र अकाब और कलंदिया क्षेत्रों में लगभग 70 फिलिस्तीनी ढांचे गिरा दिए गए हैं, जिससे संकेत मिलता है कि इस इलाके में बड़ी इजरायली बस्ती परियोजनाओं की तैयारी चल रही है।
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