भोपाल , अक्टूबर 14 -- मध्यप्रदेश संयुक्त किसान मोर्चा ने किसानों की समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर 13 अक्टूबर को मुख्यमंत्री के नाम 26 सूत्रीय मांगपत्र राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपा। मोर्चा ने मुख्यमंत्री के सचिव अरविंद दुबे, मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल तथा कृषि उत्पादन आयुक्त एवं अपर मुख्य सचिव के.सी. गुप्ता को ज्ञापन देकर मांगों पर तत्काल और समयबद्ध कार्रवाई करने का आग्रह किया।

मोर्चा ने बढ़ती कृषि लागत, खाद की कमी, प्राकृतिक आपदाओं से फसल नुकसान, उपज का लाभकारी मूल्य नहीं मिलने, सरकारी खरीदी की अव्यवस्थाओं, बिजली बिलों में अनियमितताओं, किसानों पर बढ़ते कर्ज और भूमि अधिग्रहण से जुड़ी समस्याओं को उठाया। उसने प्रभावित फसलों का पारदर्शी सर्वे कर तत्काल मुआवजा देने, धान, गेहूं, मक्का, सोयाबीन, दलहन, मोटे अनाज और कपास सहित प्रमुख फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी सुनिश्चित करने तथा खरीदी केंद्रों पर पर्याप्त बारदाना, सुचारु तुलाई और समय पर भुगतान की व्यवस्था करने की मांग की।

ज्ञापन में यूरिया, डीएपी और अन्य खाद उचित कीमत पर पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराने, खाद वितरण की ई-टोकन व्यवस्था में सुधार करने तथा सिकमी, बटाईदार, पट्टेदार और पात्र वनभूमि एवं राजस्व भूमि पर खेती करने वाले किसानों को कृषि सुविधाओं का लाभ देने की मांग भी शामिल है। मोर्चा ने कर्जमाफी और ऋण राहत योजना लागू करने, सिंचाई के लिए प्रतिदिन लगातार 10 घंटे बिजली देने तथा कृषि पंपों की बिलिंग संबंधी अनियमितताएं दूर करने की मांग की।

मोर्चा ने केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना, रूंझ और मझगांव बांध तथा ललितपुर-सिंगरौली रेलमार्ग से प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा, पुनर्वास और रोजगार देने की मांग की। उसने भूमि अधिग्रहण कानून के प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करने और किसान आंदोलनों के दौरान दर्ज कथित अनुचित मुकदमों की समीक्षा कर उन्हें वापस लेने का भी आग्रह किया। इसके अलावा प्रदेश में प्रस्तावित सातों परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं पर रोक लगाकर उनके संभावित सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभावों का स्वतंत्र आकलन कराने की मांग की गई।

अन्य मांगों में नरवाई प्रबंधन के लिए आर्थिक सहायता, कृषि यंत्रों पर अनुदान, छोटे किसानों के लिए सामुदायिक मशीन बैंक, भूमि अभिलेखों की विसंगतियों का निराकरण, खेत सड़क योजना दोबारा शुरू करना, मंडी और सहकारी समितियों के चुनाव कराना, दूध, फल और सब्जी उत्पादकों को लाभकारी मूल्य देना तथा आदिवासी किसानों के वनाधिकार सुनिश्चित करना शामिल है।

ज्ञापन सौंपने के दौरान इरफान जाफरी, प्रहलाद बैरागी, लीलाधर राजपूत, बाबूसिंह राजपूत, मोहनीश, विजय कुमार, शिवम् बघेल और समाधान पाटिल उपस्थित थे। मोर्चा ने सरकार से संबंधित विभागों को स्पष्ट निर्देश जारी करने, मांगों के निराकरण की समय-सीमा तय करने और किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर कार्रवाई की लिखित जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की है।

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