पटना , जुलाई 16 -- ौजूदा वर्ष में संभावित बाढ़ एवं सुखाड़ की स्थिति को देखते हुए इसकी पहले से तैयारी को लेकर आपदा प्रबंधन मंत्री रत्नेश सादा की अध्यक्षता में बैठक हुई। विभागीय सभागार में आयोजित इस बैठक में मंत्री ने कहा कि सभी संबंधित पदाधिकारी आपदा पीड़ितों को अपने स्तर से हरसंभव सहायता उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन के कार्यों में और अधिक तेजी लाने के उद्देश्य से राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) को विभाग के माध्यम से आवश्यकतानुसार वाहन शीघ्र उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे राहत एवं बचाव कार्यों का संचालन और अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा।
विभागीय प्रधान सचिव संतोष कुमार मल्ल के साथ सभी जिलों के सहायक आपदा प्रबंधन पदाधिकारी शामिल हुए। अपर समाहर्ता (आपदा) एवं आपदा प्रभारी वीसी के माध्यम से इस बैठक से जुड़े।
इस अवसर पर प्रधान सचिव श्री मल्ल ने बाढ़ राहत एवं अन्य आवश्यक सामग्रियों के दर निर्धारण, पॉलीथीन शीट्स की उपलब्धता, क्रय की स्थिति, नावों की व्यवस्था, नाव मालिकों के साथ एकरारनामा, बाढ़ राहत शिविरों, सामुदायिक रसोई के संचालन की तैयारी, जिलों में प्रतिनियुक्त राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), एसडीआरएफ टीमों के आवासन एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था, प्रथम चरण में निर्मित डिस्ट्रिक्ट इमर्जेंसी रिस्पांस फैसिलिटी कम ट्रेनिंग सेंटर (डीईआरएफ-टीसी) भवनों के रखरखाव, फसल आच्छादन की स्थिति, मानव एवं पशु दवाओं, पशु चारा की उपलब्धता, बाढ़ के दौरान मानव, पशु स्वास्थ्य संबंधी तैयारियों, प्राकृतिक अथवा स्थानीय प्रकृति की आपदाओं में मृत व्यक्तियों के परिजनों को अनुग्रह अनुदान का भुगतान, डीएसएस पोर्टल पर जिलों से की जा रही प्रविष्टियों, जिला आपातकालीन संचालन केंद्रों का संचालन, विभाग से निर्मित बाढ़ आश्रय स्थलों के रखरखाव, जिलों में एसी/डीसी/यूसी के लंबित मामलों सहित अन्य विषयों की समीक्षा की।
प्रधान सचिव ने संबंधित पदाधिकारियों को दिशा निर्देश दिया कि संभावित बाढ़ एवं सुखाड़ की स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सभी विभाग आपसी समन्वय में कार्य करें। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन एवं एसडीआरएफ के संयुक्त प्रयासों से आपदा के प्रभाव को न्यूनतम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन के कार्यों को और अधिक त्वरित एवं प्रभावी बनाने के उद्देश्य से एसडीआरएफ के अक्रियाशील मोटरबोटों को हटाकर नए मोटरबोट उपलब्ध कराए जाएं।
प्रधान सचिव ने सभी सहायक आपदा प्रबंधन पदाधिकारियों को बाढ़ आश्रय स्थलों का नियमित रूप से भौतिक निरीक्षण करने, निरीक्षण प्रतिवेदन अविलंब विभाग को उपलब्ध कराने, आपदा में मृत व्यक्तियों के परिजनों को अनुग्रह अनुदान का भुगतान प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित करने आदि आवश्यक निर्देश जारी किए।
इस अवसर पर अपर सचिव मो. नदीमुल गफ्फार सिद्दीकी ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से संभावित बाढ़ एवं सुखाड़ को लेकर की गई तैयारियों के विस्तृत आंकड़े प्रस्तुत किए।
बैठक में बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सचिव मो. वारिस खान, कमांडेंट, एसडीआरएफ राजेश कुमार, कार्यवाहक कमांडेंट, एनडीआरएफ अश्विनी कुमार, मंत्री के आप्त सचिव दुर्गेश कुमार, आप्त सचिव (वाह्य) सुनील कुमार वर्मा की प्रमुख उपस्थिति रही।
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