भुवनेश्वर , सितंबर 22 -- ओडिशा उच्च न्यायालय ने कहा है कि तय समय सीमा में ऑनलाइन सालाना संपत्ति का ब्योरा (प्रॉपर्टी स्टेटमेंट) जमा नही करना स्कूल शिक्षकों की पदोन्नति पर विचार करने में कोई रुकावट नहीं बन सकता है। न्यायालय ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह उनके रिटर्न भौतिक रूप से स्वीकार करे।

न्यायालय ने ओडिशा सरकार को निर्देश दिया है कि वे उन स्कूल शिक्षकों के सालाना 'प्रॉपर्टी स्टेटमेंट भौतिक' रूप से स्वीकार करें जो तय समय के भीतर एचआरएमएस पोर्टल के माध्यम से उन्हें ऑनलाइन जमा नहीं कर पाए थे, इससे उनकी पदोन्नति पर का रास्ता साफ हो गया है।

उच्च न्यायालय की एक पीठ ने यह निर्देश उन शिक्षकों द्वारा दायर एक रिट याचिका का निपटारा करते हुए दिया, जो अपर प्राइमरी स्कूलों में लेवल-पांच (बी) कैटेगरी-2 से लेवल-4 ग्रेजुएट टीचर के पदों पर प्रमोशन की मांग कर रहे थे।

याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि वे 'ओडिशा एलिमेंट्री (शिक्षकों और अधिकारियों की भर्ती की विधि और सेवा की शर्तें) नियम, 1997' के तहत पात्रता मानदंडों को पूरा करते है, जिसमें जरूरी शैक्षणिक योग्यता और लेवल-पांच (बी) पदों पर दो साल की लगातार सेवा शामिल थी। उनके नाम अंतिम ग्रेडेशन सूची में भी शामिल थे।

एक जनवरी से 31 जनवरी, 2026 के बीच एचआरएमएस के माध्यम से ऑनलाइन सालाना सम्पत्ति विवरण जमा न कर पाने के कारण उनके प्रमोशन पर असर पड़ा था।

याचिकाकर्ताओं ने रिटर्न भौतिक रूप से जमा करने की अनुमति मांगी। उन्होंने बताया कि 'ओडिशा सरकारी कर्मचारी आचरण नियम, 1959' (जुलाई 2026 में संशोधित) में तय समय के भीतर प्रॉपर्टी स्टेटमेंट जमा न करने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रावधान है।

अदालत ने माना कि हालांकि स्टेटमेंट जमा न करने से प्रमोशन की पात्रता प्रभावित हो सकती है, लेकिन आचरण नियमों में ऐसी चूक के लिए विशेष रूप से अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रावधान है।

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