फगवाड़ा , मार्च 09 -- राज्यसभा सदस्य एवं प्रसिद्ध पर्यावरणविद् संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने सोमवार को ईरान और अमेरिका-इजरायल युद्ध के समय पेयजल स्रोतों पर किये जा रहे हमलों की कड़ी निंदा की है।
यहां जारी एक प्रेस बयान में उन्होंने कहा कि संघर्ष की स्थिति में भी मानवता के सिद्धांतों और युद्ध के अंतरराष्ट्रीय नियमों का सम्मान किया जाना चाहिए। दोनों पक्षों को आम नागरिकों के लिए बने पेयजल स्रोतों को निशाना बनाने से परहेज करना चाहिए। उन्होंने कहा कि संघर्ष के दसवें दिन हुए हमलों के दौरान पानी और बिजली के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया, जिससे स्थानीय आबादी को होने वाली पेयजल आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। खबरों के अनुसार, एक अमेरिकी हवाई हमले के दौरान ईरान के कशम द्वीप पर स्थित एक डिसेलिनेशन प्लांट (समुद्र के खारे पानी को पीने योग्य बनाने वाला संयंत्र) क्षतिग्रस्त हो गया है। इस हमले के परिणामस्वरूप द्वीप के लगभग 30 गांवों की पेयजल आपूर्ति ठप हो गयी है। वर्तमान में ईरान अपनी कुल जल आपूर्ति का केवल दो प्रतिशत हिस्सा ही डिसेलिनेशन के माध्यम से उत्पादित करने की क्षमता रखता है।
संत सीचेवाल ने कहा कि लोगों को पेयजल और स्वच्छ हवा से वंचित करना एक अत्यंत अमानवीय और कायराना कृत्य है। उन्होंने कहा कि ऐसी कार्रवाइयां युद्ध के बुनियादी सिद्धांतों और मानवीय मूल्यों के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा कि भले ही लोग बमों और मिसाइलों से बच जायें, लेकिन उनके पेयजल स्रोतों पर हमला करना मानवता के साथ बड़ा विश्वासघात है। उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवन में बिजली भी एक बुनियादी जरूरत बन गयी है। समुद्र के पानी को शुद्ध करने वाली डिसेलिनेशन परियोजनाएं पूरी तरह से बिजली पर निर्भर हैं और उन्हें चौबीसों घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति की आवश्यकता होती है। इसलिए, युद्ध के दौरान बिजली के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना भी अंतरराष्ट्रीय मानवीय मानदंडों का उल्लंघन है।
संत सीचेवाल ने इस बात पर जोर दिया कि खाड़ी के रेगिस्तानी क्षेत्रों में पेयजल की आपूर्ति के लिए डिसेलिनेशन प्लांट जैसे बुनियादी ढांचे अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि युद्ध चाहे कितना भी लंबा चले, उसका अंतिम समाधान हमेशा बातचीत की मेज पर ही निकलता है। युद्ध कभी भी किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता। संत सीचेवाल ने हालिया हमलों में स्कूली बच्चों की मौत पर भी गहरा दुख व्यक्त किया और प्रार्थना की कि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाएं न हों। दुनिया भर में पीने के पानी की किल्लत बढ़ती जा रही है। विशेष रूप से खाड़ी देशों में, जहां तेल के प्रचुर भंडार हैं, वहीं पीने के पानी के प्राकृतिक स्रोत बहुत सीमित हैं। नतीजतन, ये देश समुद्र के पानी को पीने योग्य बनाने के लिए डिसेलिनेशन प्लांट पर बहुत अधिक निर्भर हैं।
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