पटना,07 (वार्ता) बिहार विधान सभा के अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने संत शिरोमणि रविदास की जयंती के अवसर पर बिहारवासियों एवं देशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं और कहा कि उन्होंने अपनी वाणी से सामाजिक समरसता, समानता और मानवता का अमर संदेश दिया।
डॉ. कुमार ने कहा कि संत रविदास का जीवन इस बात का प्रमाण है कि महानता जन्म या सामाजिक स्थिति से नहीं, बल्कि विचारों की पवित्रता, कर्म की श्रेष्ठता और मानवता की सेवा से प्राप्त होती है। उन्होंने अपनी सरल और सहज संतवाणी के माध्यम से समाज में व्याप्त भेदभाव और ऊँच-नीच की भावना को दूर करने का आह्वान किया।
विधानसभा अध्यक्ष ने संत रविदास जी की प्रसिद्ध वाणी- "मन चंगा तो कठौती में गंगा" का स्मरण किया और कहा कि उनकी उक्तियाँ आंतरिक शुचिता और निर्मल मन के महत्व को रेखांकित करती है। उन्होंने कहा कि संत रविदास का आदर्श समाज वह है, जहाँ किसी के साथ भेदभाव न हो, प्रत्येक व्यक्ति को सम्मान मिले और समाज के अंतिम व्यक्ति तक सुख, सम्मान एवं अवसर पहुँचे। उनका यह विचार आज भी समतामूलक और न्यायपूर्ण समाज के निर्माण की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि संत रविदास की भक्ति में लोकमंगल की भावना थी। उनकी वाणी में आध्यात्मिक चेतना के साथ-साथ सामाजिक परिवर्तन की शक्ति भी थी। उन्होंने लोगों को यह समझाया कि ईश्वर की भक्ति का वास्तविक अर्थ मानवता से प्रेम करना और अपने कर्म को ईमानदारी से अदा करना है।
डॉ. कुमार ने कहा कि भारतीय संविधान के न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुता के मूल आदर्शों को मजबूत करने में संत परंपरा के विचारों की महत्वपूर्ण भूमिका है। संत रविदास जी ने सदियों पहले जिस समानता और मानवीय गरिमा की बात कही, वह आज भी हमारे लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए प्रेरणास्रोत है।
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