अयोध्या , जुलाई 4 -- रामनगरी अयोध्या के हजारा मंदिर में आयोजित संत मंडल की बैठक में संतों ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से महासचिव चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार न करने की मांग की। साथ ही सरकार से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और एसआईटी की रिपोर्ट आने तक किसी निष्कर्ष पर न पहुंचने की अपील की।
महंत राघवेश दास वेदांती ने कहा कि दान राशि में कथित गड़बड़ी के आरोपों की सच्चाई एसआईटी जांच के बाद ही सामने आएगी। उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने से पहले चंपत राय को दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए और उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी से भी आय-व्यय का पूरा लेखा-जोखा सार्वजनिक करने की मांग करते हुए कहा कि यदि लोगों के मन में सवाल हैं तो ट्रस्ट को पारदर्शिता के साथ उनका जवाब देना चाहिए।
महंत वेदांती ने कहा कि चंपत राय ने राम मंदिर आंदोलन और मंदिर निर्माण में वर्षों तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने बताया कि वह वर्ष 1993 से अयोध्या में हैं और तब से चंपत राय के कार्यों को निकट से देखते रहे हैं। उनके अनुसार, जिन्होंने स्वयं निष्पक्ष जांच के लिए एसआईटी की मांग की है, उन्हें जांच पूरी होने से पहले दोषी नहीं माना जा सकता।
बैठक में संतों ने कहा कि दान राशि में चोरी और धन के दुरुपयोग के आरोप गंभीर हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष तथा पारदर्शी जांच आवश्यक है। उनका कहना था कि एसआईटी की रिपोर्ट आने के बाद ही दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और आगे का निर्णय लिया जाना चाहिए।
संतों ने एक स्वर में कहा कि राम जन्मभूमि मंदिर के दान प्रकरण की निष्पक्ष जांच हो, लेकिन जांच पूरी होने से पहले किसी की छवि धूमिल करना उचित नहीं है। उन्होंने सरकार से एसआईटी जांच शीघ्र पूरी कर सत्य सामने लाने और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की।
बैठक में महंत शशिकांत दास, महंत राजीव लोचन, महंत वैदेही वल्लभ शरण, सीताराम दास, हरिमोहन शरण और रविशंकर शरण सहित अन्य संत मौजूद रहे।
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