रांची , मई 16 -- झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने गिरिडीह जिले के मधुबन में स्थित आदिवासी संताल समाज के आराध्य स्थल मरांग बुरु दिसम मांझीथान में ताला लटका देख कर सरकार पर सवाल खड़ा किया है।
श्री मरांडी ने आज कहा कि कल रात्रि से मैं मधुबन प्रवास पर हूं। आज सुबह देवों के देव मरांग बुरु दिसम मांझीथान में पूजा-अर्चना के लिए पहुंचा, लेकिन यह देखकर मन अत्यंत आक्रोश और पीड़ा से भर गया कि मांझीथान का द्वार बंद कर दिया गया है। स्थानीय लोगों ने बताया कि इसकी चाभी प्रखंड विकास पदाधिकारी के पास रखी गई है। यह केवल एक ताला नहीं, बल्कि संताल समाज की आस्था, परंपरा और धार्मिक अधिकारों पर प्रशासनिक हस्तक्षेप का प्रतीक है।
श्री मरांडी ने पूछा कि आखिर किस अधिकार से एक सरकारी पदाधिकारी आदिवासी संताल समाज के आराध्य स्थल को अपनी निगरानी में रख सकता है? मांझीथान कोई सरकारी भवन नहीं, बल्कि हमारी आस्था, संस्कृति और पहचान का केंद्र है। वहां ताला लगाना और चाभी प्रशासन के पास रखना संताल समाज का खुला अपमान है, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
श्री मरांडी ने कहा कि राज्य के मुख्य हेमंत सोरेन अभिलंब स्पष्ट करें कि किस परिस्थिति में यह निर्णय लिया गया? यदि आदिवासी समाज के धार्मिक स्थलों पर भी प्रशासन कब्जा जमाने लगेगा, तो फिर आदिवासियों की परंपराओं और अधिकारों की रक्षा कौन करेगा?श्रीमारंडी ने कहा कि मैं स्पष्ट चेतावनी देता हूं कि मरांग बुरु दिसम मांझीथान में नियमित पूजा-अर्चना, उचित रखरखाव तथा परंपरा अनुसार नायके की नियुक्ति तत्काल सुनिश्चित की जाए। अन्यथा अगली बार मधुबन आने पर मैं स्वयं संताल समाज के लोगों को संगठित कर वहां का ताला खुलवाऊंगा और समाज की सहभागिता से नायके की नियुक्ति एवं आर्थिक सहयोग की स्थायी व्यवस्था करूंगा।
उन्होंने कहा कि आस्था पर ताला लगाने वालों को यह समझ लेना चाहिए कि संताल समाज अपनी परंपरा, संस्कृति और आराध्य के सम्मान के लिए हर संघर्ष करने को तैयार है।
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