मुंबई , अगस्त 02 -- शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के गुट पर दिल्ली के दबाव में झुकने, पार्टी के संस्थापकों की तस्वीरें सार्वजनिक मंचों से हटाने और प्रशासन में भ्रष्टाचार फैलाने का आरोप लगाया है।

श्री राउत की तीखी टिप्पणियों, जिसमें सत्ताधारी खेमे की विचारधारा की वैधता पर सवाल उठाने से लेकर वरिष्ठ नेताओं की राष्ट्रीय स्तर पर संभावित भूमिका और सिद्धिविनायक मंदिर में हेराफेरी जैसे सनसनीखेज दावों ने टकराव के कई मोर्चे खोल दिए हैं।

श्री राउत ने बालासाहेब ठाकरे और आनंद दिघे की विरासत पर श्री एकनाथ शिंदे के दावे का मजाक उड़ाते हुए कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दौरे के लिए लगाए गए स्वागत बैनरों से उनकी तस्वीरें जानबूझकर गायब रखी गईं। श्री राउत ने सत्ताधारी नेतृत्व पर गुस्सा जाहिर करते हुए दावा किया, "मालिक ने बालासाहेब की तस्वीर न लगाने का निर्देश दिया है।" उन्होंने इस गुट को केंद्रीय आलाकमान के सामने कांपने वाले 'कायर' करार दिया।

श्री राउत ने एक अहम राजनीतिक टिप्पणी में दावा किया कि केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय में कामकाज की खामियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कदम उठाने पर मजबूर किया, जिससे बड़े प्रशासनिक बदलावों की अटकलें तेज हो गई हैं। श्री राउत ने इसके अलावा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की आंतरिक 'आलाकमान संस्कृति' पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पार्टी दिल्ली से पूरा नियंत्रण बनाए रखने के लिए अलग-अलग राज्यों में कम चर्चित और कम काबिल नेताओं को बिठाकर लोकप्रिय क्षेत्रीय नेतृत्व को व्यवस्थित रूप से किनारे कर देती है।

सांसद श्री राउत ने प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर से जुड़ी भ्रष्टाचार की गंभीर चिंताओं का समर्थन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर का प्रशासनिक नियंत्रण और चाबियां एकनाथ शिंदे के वफादारों के हाथों में आते ही वित्तीय अनियमितताएं और व्यवस्थित तरीके से धन की हेराफेरी शुरू हो गई।

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