मुंबई , मार्च 07 -- शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने शनिवार को महाराष्ट्र के सत्ताधारी नेताओं पर चुनाव के दौरान विधायकों की खरीद-फरोख्त में लिप्त रहने का आरोप लगाया।
उन्होंने यह भी दावा किया कि सत्ता पक्ष भ्रष्टाचार और ठेकेदारी के जरिये भारी संपत्ति जमा कर रहा है।
मीडिया से बात करते हुए श्री राउत ने आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल ने भ्रष्टाचार और ठेकेदारों के नेटवर्क के जरिये अकूत दौलत इकट्ठा की है और अब वे धनबल के दम पर चुनाव लड़ते हैं। उन्होंने दावा किया, "ऐसा लगता है कि उन्हें विधायकों की खरीद-फरोख्त का चस्का लग गया है।"आगामी विधान परिषद चुनावों का ज़िक्र करते हुए श्री राउत ने कहा कि विपक्षी दलों के नेता चाहते हैं कि शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे इन चुनावों के जरिये दोबारा विधानमंडल में लौटें। उन्होंने बताया कि चुनाव कार्यक्रम की घोषणा होने के बाद 'महा विकास अघाड़ी' (एमवीए) इस पर अंतिम फैसला लेगी।
श्री राउत ने भरोसा जताया कि विधान परिषद चुनाव में विपक्षी गठबंधन के दो उम्मीदवार जीत सकते हैं। साथ ही उन्होंने यह आशंका भी जतायी कि आगामी चुनाव में भी सत्ता पक्ष की ओर से विधायकों की खरीद-फरोख्त की पूरी गुंजाइश है।
उन्होंने हालांकि विश्वास जताया कि विपक्षी गठबंधन के विधायक ऐसे किसी भी लालच का शिकार नहीं होंगे। सांसद संजय राउत ने कहा, "मौजूदा शासकों को लगता है कि देश में कोई विपक्ष होना ही नहीं चाहिए।"श्री राउत ने शिवसेना (यूबीटी) विधायक आदित्य ठाकरे के उन आरोपों का भी समर्थन किया, जिनमें कहा गया था कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का पेश किया गया राज्य का बजट बड़े पैमाने पर ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने वाला है।
उन्होंने कहा कि श्री उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पिछली सरकार किसानों की पूरी कर्जमाफी की दिशा में आगे बढ़ रही थी, लेकिन तभी उसे गिरा दिया गया। श्री राउत ने कहा, "अब यह मौजूदा सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है कि वह कर्जमाफी के जरिये किसानों को पूरी राहत दे।"श्री राउत ने कहा कि किसान सिर्फ कर्जमाफी नहीं चाहते, बल्कि उन्हें अपनी उपज के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी और सही फसल बीमा की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आश्वासनों के बावजूद 11 साल बीत जाने के बाद भी गारंटीशुदा कीमतों का वादा पूरा नहीं हुआ है।
अंतरराष्ट्रीय हालात पर टिप्पणी करते हुए श्री राउत ने कहा कि देश में ज्यादातर चर्चा अमेरिका, इजरायल और ईरान के तनाव की वजह से गैस और पेट्रोलियम की संभावित कमी पर हो रही है। लेकिन उन्होंने आरोप लगाया कि इस बीच कृषि निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जिससे किसानों की बड़ी मात्रा में उपज बर्बाद हो रही है।
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