जमुई , मार्च 08 -- जमुई जिले की महादलित मुसहर समाज की एक बेटी उर्मिला कुमारी ने अपने संघर्ष से भरे जीवन में मेहनत और हौसले से खुद के लिए एक नई पहचान बनाई है और अब दलित समाज के बच्चों का मार्गदर्शन रही है।

जिले के खैरा प्रखंड के धर्मपुर महादलित टोले की उर्मिला कुमारी आज अपने समाज के लिए प्रेरणा का श्रोत बन चुकी हैं।गरीबी और पारिवारिक संकट के बीच भी उन्होंने शिक्षा का रास्ता नहीं छोड़ा और नर्सिंग की पढ़ाई पूरी कर सहायक नर्स (एएनएम) बन गईं।अब वह स्वास्थ्य सेवा के साथ अपने समाज के बच्चों को शिक्षा के लिए भी प्रेरित कर रही हैं।

उर्मिला अपने इलाके में समाज की पहली लड़की हैं, जिसने मैट्रिक की परीक्षा पास की।इसके बाद उन्होंने इंटर की पढ़ाई पूरी की और नर्सिंग की पढ़ाई कर एएनएम बनीं।फिलहाल वह ग्रेजुएशन की तैयारी भी कर रही हैं।उनकी इस उपलब्धि से गांव और आसपास के क्षेत्रों में उन्हें उम्मीद की किरण के रूप में देखा जा रहा है।

उर्मिला का बचपन कठिन परिस्थितियों में गुजरा। बहुत छोटी उम्र में ही सर से पिता जगदीश मांझी का साया उठ गया और मां भी सदमे के कारण मानसिक रूप से बीमार हो गईं। ऐसी स्थिति में उर्मिला को अपनी नानी के घर रहना पड़ा।

उर्मिला बताती हैं कि उनके समाज के अधिकांश बच्चे बचपन से ही मजदूरी करने लगते हैं।कोई ईंट-भट्टों पर काम करता है,कोई जंगल से लकड़ी लाता है तो कोई खेतों में मजदूरी करता है।वह खुद भी बचपन में ऐसे ही काम करती थीं। बताया कि मजदूरी के दौरान मिलने वाले पैसों का सही हिसाब तक नहीं समझ पाने से यह एहसास हुआ कि शिक्षा बेहद जरूरी है।तभी उसने ठान लिया कि चाहे कितनी भी मुश्किलें आएं,पढ़ाई जरूर करेंगी।

कड़ी मेहनत के बाद मैट्रिक और इंटर की पढ़ाई पूरी करने के बाद नर्सिंग कर एएनएम बन गईं।अब वह अपने गांव और आसपास के महादलित टोले में बच्चों को मुफ्त में पढ़ाती हैं और लोगों को शिक्षा के महत्व के बारे में जागरूक करती हैं।

एएनएम बनने के बाद उर्मिला अब गांव-गांव जाकर लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक कर रही हैं।साथ ही बच्चों और बच्चियों को शिक्षा के लिए प्रेरित भी कर रही हैं। उनका सपना आगे सामान्य नर्सिंग एवं प्रसूति विद्या (जीएनएम) बनने का है और वह पढ़ाई जारी रखना चाहती हैं।उर्मिला का कहना है कि शादी के बाद भी वह पढ़ाई नहीं छोड़ेंगी।

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