नयी दिल्ली , जनवरी 20 -- भारत की उपभोग-आधारित आर्थिक वृद्धि अब एक नए और निर्णायक चरण में प्रवेश कर रही है जो अब केवल बड़े महानगरों तथा शहरों तक सीमित नहीं है बल्कि श्रेणी दो और श्रेणी तीन शहर अब मांग, उद्यमिता और दीर्घकालिक आर्थिक गति को आगे बढ़ा रहे हैं।
कंज़्यूमर ब्रांड्स में निवेश करने वाली वेंचर कैपिटल फर्म रुकम कैपिटल ने अपनी नई रिसर्च रिपोर्ट "बियॉन्ड मेट्रोस: द रियल स्टोरी ऑफ़ भारत नेक्स्ट 500 मिलियन" में यह जानकारी दी गयी है।
यह रिपोर्ट ऐसे समय में सामने आई है जब भारत की आर्थिक गतिविधियों का केंद्र स्पष्ट रूप से मेट्रो शहरों से आगे बढ़ रहा है। देश की लगभग 65 प्रतिशत आबादी अब श्रेणी दो और श्रेणी तीन शहरों तथा ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है। जीएसटी के जरिए औपचारिकरण, कीमतों में सुधार से बढ़ती वहनीयता और थ्री तथा फोर जी नेटवर्क से लेकर यूपीआई जैसे डिजिटल पब्लिक आधारभूत ढांचे के तेज विस्तार ने भारत को उपभोग वृद्धि का अगला बड़ा इंजन बना दिया है।
यह उपभोक्ता रिपोर्ट मेट्रो-केंद्रित धारणाओं से हटकर यह दिखाती है कि भारत में उपभोग का व्यवहार अलग सोच और तर्क पर आधारित है | रिपोर्ट बताती है कि आज का भारत उपभोक्ता न तो जल्दबाज़ी में खरीदारी करता है और न ही केवल विज्ञापनों से प्रभावित होता है, बल्कि वह जानकारी-आधारित, रिसर्च-ड्रिवन और भरोसे पर आधारित फैसले लेता है।
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