वाराणसी , फरवरी 16 -- महाशिवरात्रि महोत्सव के अवसर पर श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास द्वारा अपनाए गए कई नवाचारों में "नंदी आराधना" विशेष रूप से उल्लेखनीय है।

न्यास के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्व भूषण मिश्र ने सोमवार को बताया कि इस आधुनिक युग में यह नवाचार अत्यंत महत्वपूर्ण है। आज के समय में नंदेश्वर (बैल) के संरक्षण की चुनौती बढ़ गई है। कृषि सहित विभिन्न क्षेत्रों में बैलों का उपयोग लगभग समाप्त हो चुका है, जिससे उनका पालन, संरक्षण और पोषण एक बड़ी चुनौती बन गया है।

उन्होंने कहा कि श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास पिछले दो वर्षों से प्रत्येक प्रदोष तिथि पर नंदेश्वर का अभिषेक कर रहा है। इस वर्ष महाशिवरात्रि से "नंदी आराधना" का उत्सव न्यास के प्रबंधनाधीन श्री संकटहरण हनुमान मंदिर, बेनीपुर (सारनाथ) की गोशाला से शुरू किया गया है। वहां रह रहे नंदियों का पौष्टिक भोजन, चिकित्सा एवं समुचित देखभाल सुनिश्चित की जा रही है।

श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास द्वारा प्रत्येक प्रदोष तिथि पर धाम स्थित नंदी जी की प्रतिमा पर अभिषेक किया जाता है। महाशिवरात्रि पर्व से न्यास द्वारा संचालित श्री संकटहरण हनुमान मंदिर गोशाला, बेनीपुर, सारनाथ से "नंदी आराधना" नामक नवाचार प्रारंभ किया गया है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित