श्रीनगर (पौड़ी) , नवम्बर 13 -- उत्तराखंड के श्रीनगर में राजकीय मेडिकल कॉलेज में आज सतत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान और महामारी विज्ञान से संबंधित नवीनतम जानकारियों पर चर्चा की गई।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता यूनिवर्सिटी ऑफ कैनबरा, ऑस्ट्रेलिया की प्रोफेसर एमेरिटा डॉ. रीना घिल्डियाल ने ''महामारियाँ - पुरानी और नई तथा वायरल रोगों का प्रभाव'' विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने इतिहास में फैली विभिन्न महामारियों जैसे प्लेग, स्पैनिश फ्लू, सार्स, इबोला और कोविड-19 के क्रमवार अध्ययन के माध्यम से चिकित्सा विज्ञान में हुए महत्वपूर्ण वैज्ञानिक और तकनीकी उन्नयन पर विस्तार से प्रकाश डाला।
डॉ. घिल्डियाल ने बताया कि महामारियाँ केवल स्वास्थ्य संकट नहीं होतीं, बल्कि ये विज्ञान, तकनीक और नीति-निर्माण के क्षेत्र में भी नवाचार को प्रेरित करती हैं। उन्होंने कहा कि दवाओं के तीव्र विकास, वैक्सीन प्लेटफॉर्म की स्थापना और आधुनिक महामारी विज्ञान का विकास मानवता की वैज्ञानिक उपलब्धियों के श्रेष्ठ उदाहरण हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि ''महामारियों पर नियंत्रण केवल वैज्ञानिक अनुसंधान, प्रौद्योगिकी के प्रभावी उपयोग और अंतर-विषयी सहयोग से ही संभव है। वैश्विक स्तर पर सूचना साझाकरण, डेटा एनालिटिक्स और सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति में समन्वय से भविष्य में किसी भी महामारी का प्रभावी प्रबंधन किया जा सकता है।'कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सयाना ने अपने संबोधन में कोविड-19 महामारी के दौरान चिकित्सा समुदाय द्वारा झेली गई चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि उस कठिन समय ने पूरे देश में एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण और अनुसंधान-उन्मुख सोच को जन्म दिया। उन्होंने कहा कि ''भविष्य की किसी भी महामारी या स्वास्थ्य संकट से निपटने के लिए विभिन्न क्षेत्रों का समन्वित सहयोग ही सबसे प्रभावी उपाय है।''इस अवसर पर कॉलेज के अनेक संकाय सदस्य, चिकित्सक एवं एमबीबीएस छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे। कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने विषय पर प्रश्नोत्तर सत्र में सक्रिय भागीदारी की और महामारी से जुड़ी कई जिज्ञासाओं के समाधान प्राप्त किए।
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