श्रीनगर , अक्टूबर 23 -- जम्मू कश्मीर में श्रीनगर के उपायुक्त जुबैर अमीन बंगरू नजरबंदी आदेश के मामले में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय के समक्ष पेश हुए।
न्यायालय ने नजरबंदी आदेश के कथित यांत्रिक (बिना सोचे-समझे) होने पर गंभीर सवाल उठाये थे।
न्यायाधीश वसीम सादिक नरगल की अदालत में 22 अक्टूबर को बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई के दौरान 15 अक्टूबर के उसके पिछले आदेश के अनुपालन में उपायुक्त उपस्थित हुए।
न्यायालय में बहस पूरी हुई और न्यायाधीश ने दोनों पक्षों के वकीलों को निर्देश दिया कि वे अगली सुनवाई पर संक्षिप्त सारांश पेश करें, साथ ही उन फैसलों की प्रतियां भी दें जिनका वे हवाला देना चाहते हैं। वरिष्ठ अतिरिक्त महाधिवक्ता मोहसिन-उल-शौकत कादरी को भी निर्देश दिया गया कि वह अगली तारीख पर हिरासत से जुड़ा रिकॉर्ड पेश करें।
यह मामला 29 अक्टूबर की सप्लीमेंट्री कॉज़ लिस्ट में शामिल किया गया है जिसका सीमित उद्देश्य सारांश और फैसला दाखिल करना है।
उच्च न्यायालय ने 15 अक्टूबर को बंगरू के खिलाफ जारी हिरासत आदेश के कथित रूप से यांत्रिक रूप से तैयार किये जाने पर गंभीर चिंता व्यक्त की थी। न्यायालय ने सवाल उठाया था कि क्या हिरासत का निर्णय करने वाले अधिकारी ने पुलिस द्वारा उपलब्ध करायी गयी सामग्री पर स्वतंत्र रूप से अपना दिमाग लगाया था।
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