श्रीगंगानगर , सितंबर 04 -- राजस्थान के श्रीगंगानगर में राजकीय मेडिकल कॉलेज बनने के बाद अस्पताल में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है और नए विभाग खुलने वाले हैं, लेकिन नर्सिंग स्टाफ की स्थिति जस की तस बनी हुई है।

राजस्थान नर्सेज संघ के नवनिर्वाचित जिलाध्यक्ष नवदीपसिंह मान ने शुक्रवार को मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. पीके वैरवाल से कहा कि मेडिकल कॉलेज बनने के बाद चिकित्सकों के पद तो बढ़ाए गए हैं, लेकिन नर्सों के पद भारतीय नर्सिंग काउंसिल (आईएनसी) के मानकों के अनुरूप नहीं बढ़ाए गए। राजस्थान चिकित्सा शिक्षा संस्था (राजमेस) ने नए पद स्वीकृत जरूर किए हैं, लेकिन बजट न मिलने के कारण कार्यरत नर्सों को करीब तीन महीने से वेतन नहीं मिला है।

उन्होंने प्रिंसिपल से कार्यरत नर्सों को तुरंत समयबद्ध वेतन भुगतान करवाना और नए स्वीकृत पदों के लिए बजट जारी कराने की दिशा में तत्काल कार्रवाई करने की मांग की।

श्री मान ने कहा कि मेडिकल कॉलेज बनने के बाद संबद्ध अस्पताल में ओपीडी और आईपीडी दोनों में मरीजों का दबाव बढ़ा है। नए विभाग प्रस्तावित हैं जिससे कार्यभार और बढ़ेगा। चिकित्सकों की संख्या बढ़ाने का काम हो रहा है, लेकिन नर्सिंग स्टाफ उसी अनुपात में नहीं बढ़ाया गया। नतीजा यह है कि मौजूदा नर्सों पर काम का बोझ बढ़ गया है और सेवा की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है।

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