श्रीगंगानगर , सितम्बर 24 -- राजस्थान में नगर परिषद के नवनिर्वाचित सभापति अजय दावड़ा ने गुरुवार को कार्यभार ग्रहण करने के बाद सदस्य प्रमाण पत्र जारी करने की व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार अब ये प्रमाण पत्र सीधे स्टांप पेपर पर जारी किये जाएंगे और इसके लिए समाचार पत्रों में आपत्ति सूचना प्रकाशित कराने की पुरानी अनिवार्यता समाप्त कर दी गयी है। श्री दावड़ा ने कहा कि इससे आम नागरिकों को राहत मिलेगी और प्रमाण पत्र एक दिन में मिल सकेगा। नगर परिषद पहले संपत्ति उत्तराधिकार संबंधी मामलों में उत्तराधिकार प्रमाण पत्र जारी करती थी। इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया अपनाई जाती थी। बाद में यह अधिकार न्यायिक क्षेत्र को दे दिया गया और अब अदालतें ही उत्तराधिकार प्रमाण पत्र जारी करती हैं। अदालती प्रक्रिया लंबी होने के कारण नगर परिषद ने एक वैकल्पिक रास्ता निकाला। प्रक्रिया करीब वैसी ही रखी गयी, लेकिन दस्तावेज का नाम बदलकर सदस्य प्रमाण पत्र कर दिया गया।
पुरानी व्यवस्था में आवेदक को आपत्ति सूचना अखबारों में प्रकाशित करानी पड़ती थी और उसका शुल्क भी देना पड़ता था। इसी के चलते नगर परिषद में भीड़भाड़, मारामारी और आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला चलता रहता था। पिछले कुछ दिनों से प्रमाण पत्र जारी नहीं होने से नागरिकों को बैंक, संपत्ति और अन्य जरूरी कामों के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा था।
सभापति दावड़ा ने कहा कि अब आवेदक निर्धारित कागजात वार्ड पार्षद के निजी सहायक के कक्ष में जमा करा सकते हैं। इसके लिए प्रार्थना पत्र, आवेदक का पचास रुपये के स्टांप पर शपथ पत्र, दो पड़ोसियों या गवाहों के 50-50 रुपये के स्टांप पर शपथ पत्र, 50 रुपये के स्टांप पर सहमति पत्र, आवेदक और संबंधित व्यक्तियों के आधार कार्ड की प्रतियां, पासपोर्ट साइज फोटो और संबंधित वार्ड पार्षद की रिपोर्ट जमा करानी होगी।
उन्होंने कहा कि सभी दस्तावेज पूरे पाये जाते हैं, तो सदस्य प्रमाण पत्र उसी दिन या एक दिन के अंदर जारी कर दिया जाएगा। प्रक्रिया सरल होने से आमजन को बड़ी राहत मिलेगी।
नयी व्यवस्था के साथ एक महत्वपूर्ण सवाल भी सामने आया है। स्टांप पेपर की सत्यता की जांच कैसे की जाएगी, यह स्पष्ट नहीं है। स्टांप पर फर्जी हस्ताक्षर की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता। ऐसे मामलों में आपसी झगड़े, संपत्ति विवाद और कानूनी लड़ाई बढ़ने का अंदेशा जताया जा रहा है। इस बाबत नगर परिषद आयुक्त मिल्खराज चुघ से जब सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि नये सभापति के पहले बड़े प्रशासनिक फैसले ने प्रक्रिया तो तेज कर दी है, लेकिन दस्तावेजों की जांच और दुरुपयोग रोकने की व्यवस्था अभी साफ नहीं है। नागरिकों को राहत मिलेगी या नये विवाद खड़े होंगे, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।
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