श्रीगंगानगर , दिसंबर 22 -- राजस्थान में श्रीगंगानगर जिले के रायसिंहनगर के समेजा कोठी थाना क्षेत्र में सीमावर्ती गांव भोमपुरा की एक गौशाला में प्रबंधकों की कथित लापरवाही के कारण 100 से अधिक गोवंश की मौत के बहुचर्चित मामले में पुलिस ने सोमवार को गौशाला प्रबंधन समिति के अध्यक्ष पालाराम बिश्नोई को गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस सूत्रों ने बताया कि उसे अदालत में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। बिश्नोई की ओर से जमानत याचिका दाखिल की गई है, जिस पर कल मंगलवार को सुनवाई होने की संभावना है।

पुलिस ने बताया कि उन्होंने प्रबंधन समिति के एक अन्य पदाधिकारी और एक कर्मचारी को देर शाम पकड़ा। इन दोनों की औपचारिक गिरफ्तारी कल मंगलवार को होने की उम्मीद है।

थाना प्रभारी कृष्णकुमार ने बताया कि जांच के दौरान प्रबंध समिति के सदस्यों की लापरवाही स्पष्ट रूप से सामने आई है, जिसके आधार पर यह कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच जारी है और जल्द ही अन्य जिम्मेदारों पर भी शिकंजा कसा जाएगा।

इस मामले ने न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि पूरे देश में हंगामा मचा दिया है। गौरक्षा दल सहित कई संगठन लगातार मांग कर रहे हैं कि सिर्फ गौशाला प्रबंध समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों पर ही सख्त कार्रवाई न की जाए, बल्कि जिला प्रशासन के उन अधिकारियों पर भी कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, जिनका दायित्व समय-समय पर गौशाला की व्यवस्थाओं का निरीक्षण करना था। इन संगठनों का कहना है कि प्रशासनिक अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर ही राज्य सरकार गौशालाओं को अनुदान प्रदान करती है। इस गौशाला को भी इसी वर्ष एक प्रशासनिक अधिकारी की रिपोर्ट के बाद 65 लाख रुपये का अनुदान दिया गया था।

इसके अलावा एक प्रमुख संत राजन प्रकाश ने गौशाला को अपनी ओर से 12 लाख रुपये का वित्तीय सहयोग प्रदान किया था। उन्होंने गौशाला में एक कथा का आयोजन भी किया, जिसमें प्राप्त हुए करीब तीन लाख रुपये के चढ़ावे की राशि भी इसी गौशाला को दान कर दी गई थी। इन सभी सहायता राशियों के बावजूद, गौशाला में इतनी बड़ी संख्या में गौवंश की मौत होना प्रबंधन की गंभीर लापरवाही है।

पिछले हफ्ते जब यह मामला सामने आया तो प्रशासन और पुलिस के अधिकारी तुरंत गौशाला पहुंचे। इस दौरान प्रबंध समिति के अध्यक्ष पालाराम बिश्नोई ने तत्काल इस्तीफा देकर खुद को जिम्मेदारी से अलग करने की कोशिश की। हालांकि अगले ही दिन यह घटना राजस्थान से निकलकर पूरे देश में चर्चा का विषय बन गई। परिणामस्वरूप राज्य सरकार ने उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया। संत राजन प्रकाश की शिकायत पर प्रबंध समिति के अध्यक्ष और अन्य पदाधिकारियों के खिलाफ गौवंश संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया।

इस दौरान उच्च स्तरीय जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट जिला कलेक्टर को सौंप दी है। रिपोर्ट में गौवंश की मौत का मुख्य कारण गौशाला में गायों को दूषित चारा खिलाना बताया गया है। जांच के दौरान चारे में फंगस पाया गया जो जानवरों की मौत का प्रमुख कारण बना। आज देर शाम रायसिंहनगर में गौ रक्षा दल के पदाधिकारियों ने कैंडल मार्च निकाला और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

राज्य सरकार ने इस मामले में एक पशु चिकित्सक को लापरवाही का जिम्मेदार ठहराते हुए निलंबित किया है। हालांकि जांच में अन्य उच्च अधिकारियों की लापरवाही भी सामने आ रही है लेकिन उनके खिलाफ अब तक कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया है।

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