नयी दिल्ली , फ़रवरी 27 -- केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने शुक्रवार को कहा कि भारत के संघीय ढांचे में केन्द्र एवं राज्य समान भागीदार हैं और श्रम सुधारों को आगे बढ़ाने के लिए उन्हें मिलकर काम करना चाहिए।
डॉ. मांडविया ने आज यहां कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के मुख्यालय में श्रम संहिता तथा अन्य पहलुओं पर राज्यों/केन्द्र-शासित प्रदेशों के पांचवें क्षेत्रीय सम्मेलन का शुभारंभ किया। उन्होंने अपने उद्घाटन भाषण में इस बात पर जोर दिया कि भारत के संघीय ढांचे में केन्द्र एवं राज्य समान भागीदार हैं और श्रम सुधारों को आगे बढ़ाने के लिए उन्हें मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि तेजी से बदलती अर्थव्यवस्था की आकांक्षाओं के अनुरूप देश के श्रम परिदृश्य में व्यापक सुधारों की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी।
उन्होंने बताया कि भारत के श्रम तंत्र को अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों, वैश्विक मानकों और अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) जैसे संगठनों के दिशानिर्देशों के अनुरूप बनाने के उद्देश्य से चार श्रम संहिताएं 2019 और 2020 में लागू की गईं।
केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि 21 नवंबर 2025 को इन संहिताओं के लागू होने के बाद श्रमिकों और उद्योग जगत, दोनों ने इनका समान रूप से स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि भारत के सुधार संबंधी प्रयासों को आईएलओ और अंतरराष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा संघ (आईएसएसए) जैसे प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संगठनों से मान्यता मिली है और द इकोनॉमिस्ट तथा द फाइनेंशियल टाइम्स सहित अग्रणी वैश्विक प्रकाशनों द्वारा भी इनकी सराहना की गई है। इन प्रकाशनों ने श्रमिकों की सुरक्षा को मजबूत करने और सुरक्षित एवं अधिक स्थायी रोजगार के साथ एक आधुनिक कार्यबल के निर्माण हेतु संहिताओं के प्रावधानों को स्वीकार किया है।
उन्होंने कहा कि यह केन्द्र और राज्यों/केन्द्र-शासित प्रदेशों के बीच समन्वय का एक मंच है और इससे संहिताओं के प्रभावी कार्यान्वयन हेतु विचारों की एकजुटता और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों का आदान-प्रदान संभव होता है। उन्होंने राज्यों से आग्रह किया कि वे जहां भी जरूरत हो, विशेष रूप से मजबूत आईटी अवसंरचना के निर्माण में, केन्द्र से सहयोग लें।
केन्द्रीय मंत्री ने ई-श्रम पोर्टल को सुदृढ़ बनाने के लिए सुझाव देने हेतु राज्यों का आह्वान किया ताकि देश भर में असंगठित श्रमिकों को लाभ का अधिकतम वितरण संभव हो सके। उन्होंने प्रधानमंत्री विकसित भारत योजना (पीएमवीबीवाई) के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह लघु उद्यमों और कर्मचारियों, दोनों को सशक्त बनाने की एक पहल है। उन्होंने केन्द्रीय श्रम आयुक्तों की संरचना और राज्यों के श्रम विभागों को समन्वित कार्यान्वयन के लिए मिलकर काम करने के लिए प्रोत्साहित किया।
डॉ. मांडविया ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के "एक्ट ईस्ट" विजन के अनुरूप औद्योगिक विकास को गति देने, मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र का विस्तार करने और रोजगार सृजन को प्रोत्साहित करने में पूर्वोत्तर राज्यों की अपार संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि दो- दिवसीय विचार-विमर्श केन्द्र और राज्यों के बीच सहयोग को और मजबूत करेगा। उन्होंने सम्मेलन की सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं और समावेशी विकास, श्रमिक के कल्याण में सुधार एवं व्यवसाय करने में सुगमता के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया।
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