चित्तौड़गढ़ , अगस्त 06 -- राजस्थान में चित्तौड़गढ़ स्थित सैनिक स्कूल के 66वें स्थापना दिवस के अवसर पर स्कूल के पूर्व छात्र एवं शौर्य चक्र विजेता ब्रिगेडियर जितेंद्र सिंह शेखावत ने अपने साहस, नेतृत्व एवं सैन्य जीवन के अनुभव साझा करते हुए कैडेट्स को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित किया।
स्कूल के जनसंपर्क अधिकारी बाबूलाल शिवरान ने गुरुवार को बताया कि अपने प्रेरक संबोधन में ब्रिगेडियर शेखावत ने कहा कि जीवन में सफलता का आधार दृढ़ संकल्प, कठिन परिश्रम और उत्कृष्ट चरित्र होता है। उन्होंने कैडेट्स से सेवा, ईमानदारी और नेतृत्व के उच्च आदर्शों को अपनाने का आह्वान किया। उनके ओजस्वी उद्बोधन ने कैडेट्स में देशभक्ति, कर्तव्यनिष्ठा एवं नेतृत्व की भावना को और अधिक सुदृढ़ किया तथा विद्यालय की गौरवशाली परंपराओं और मूल्यों को नयी ऊर्जा प्रदान की।
ब्रिगेडियर शेखावत ने राष्ट्रसेवा के दौरान प्राप्त अनुभवों को साझा करते हुए विपरीत परिस्थितियों में धैर्य, दृढ़ता और सकारात्मक सोच बनाये रखने का संदेश दिया। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कैडेट्स द्वारा पूछे गए विभिन्न प्रश्नों के उत्तर देकर उनकी जिज्ञासाओं का समाधान भी किया।
इस अवसर पर स्कूल के पूर्व छात्र लेफ्टिनेंट कर्नल विजय पाल सिंह ने भी अपने सैन्य जीवन के अनुभव साझा किये और कैडेट्स को अनुशासन, समर्पण और उत्कृष्टता के मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
ब्रिगेडियर शेखावत ने अपने सैन्य जीवन के अनुभवों के आधार पर कैडेट्स को साहस, त्याग, अनुशासन, नेतृत्व और राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण का संदेश दिया। 1997 में आतंकवाद-विरोधी ऑपरेशन के दौरान, गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद, ब्रिगेडियर शेखावत ने असाधारण साहस दिखाया और अकेले ही तीन आतंकवादियों को मार गिराया। उनकी असाधारण बहादुरी और कर्तव्य के प्रति अटूट निष्ठा के लिए, भारत के माननीय राष्ट्रपति ने उन्हें प्रतिष्ठित शौर्य चक्र से सम्मानित किया। ब्रिगेडियर शेखावत के नेतृत्व में उनकी बटालियन ने 24 घंटे में साढ़े चार लाख पौधे लगाकर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया। पर्यावरण संरक्षण में इस बेहतरीन योगदान के लिए, उन्हें इंदिरा गांधी पर्यावरण पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में स्कूल के प्राचार्य कर्नल अनिल देव सिंह जसरोटिया, उप प्राचार्या लेफ्टिनेंट कर्नल ईशा ठकराल और प्रशासनिक अधिकारी मेजर सी श्रीकुमार ने स्कूल परिवार की ओर से ब्रिगेडियर शेखावत का स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मान किया।
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