बेंगलुरु , जुलाई 10 -- केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलाजे ने कर्नाटक सरकार के प्रस्तावित 'स्थायी निवास प्रमाण पत्र' (पीआरसी ) को लेकर विरोध दर्ज कराया है और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से तुरंत दखल देने की अपील की है।

श्रीमती करंदलाजे ने आरोप लगाया है कि यह असंवैधानिक है, 'एकल नागरिकता' के सिद्धांत का उल्लंघन करता है और इससे राष्ट्रीय सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है।

श्रीमती करंदलाजे ने कर्नाटक ने आठ जुलाई को भेजे गए एक विस्तृत पत्र में पीआरसी 2026 के मामले में गृह मंत्रालय से दखल देने की अपील की है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के पास स्थायी निवासियों की एक अलग श्रेणी बनाने का कोई संवैधानिक या कानूनी अधिकार नहीं है। उन्होंने लिखा, "भारतयी संविधान देश भर के सभी नागरिकों के लिए एक ही नागरिकता की व्यवस्था करता है। कर्नाटक सरकार द्वारा 'स्थायी निवास प्रमाण पत्र' शुरू करना इस संवैधानिक ढांचे के खिलाफ है।"केंद्रीय मंत्री के अनुसार, यह अधिसूचना बिना किसी संवैधानिक मंजूरी के एक अलग कानूनी श्रेणी बनाता है और निवासियों की एक श्रेणी को मनमाने ढंग से विशेष दर्जा देकर अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करता है।

उन्होंने कहा, "राज्य सरकार असल में एक ऐसी अलग कानूनी व्यवस्था बना रही है जिसे संविधान से कोई मंजूरी नहीं मिली है।" उन्होंने कहा कि इस वर्गीकरण का किसी वैध संवैधानिक उद्देश्य से कोई तार्किक संबंध नहीं है। श्रीमती करंदलाजे ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए दूरगामी परिणामों वाला मामला भी बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिसूचना में बताई गई पात्रता शर्तें मुख्य रूप से निवास के प्रमाण और स्थानीय राजस्व अधिकारियों द्वारा सत्यापन पर आधारित हैं, जबकि इसमें सक्षम केंद्रीय एजेंसियों द्वारा भारतीय नागरिकता के सत्यापन की कोई आवश्यकता नहीं है।

उन्होंने कहा कि नागरिकता की जांच की कोई मज़बूत प्रणाली नहीं होने से कर्नाटक में गैर-कानूनी तरीके से रह रहे विदेशी नागरिक या अवैध प्रवासी, नकली कागज़ात या स्थानीय सत्यापन के ज़रिए 'स्थायी निवास प्रमाण-पत्र' हासिल कर सकते हैं। उन्होंने कहा, "एक बार ऐसा प्रमाण-पत्र जारी हो जाने पर, इसका इस्तेमाल राज्य की विभिन्न सुविधाओं, सरकारी कागज़ात, शेक्षणिक संस्थानों में दाखिले, नौकरी के मौकों और अन्य लाभों को पाने के लिए किया जा सकता है, जिससे उनका गैर-कानूनी निवास वैध हो जाएगा।"केंद्रीय मंत्री ने कहा कि राज्य-स्तर का कोई भी ऐसा दस्तावेज़ जो सरकारी सुविधाओं का लाभ दिला सकता है, उसमें यह सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा उपाय होने चाहिए कि केवल भारतीय नागरिक ही इसके लिए पात्र हों। इस अधिसूचना को 'गंभीर संवैधानिक, कानूनी और राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताएं' पैदा करने वाला बताते हुए श्रीमती करंदलाजे ने गृह मंत्रालय से आग्रह किया कि वह जांच करे कि क्या राज्य सरकार ने अपनी संवैधानिक शक्तियों का उल्लंघन किया है और सीआरसी ढांचे को उसके मौजूदा रूप में लागू होने से रोकने के लिए उचित कदम उठाए।

यह पत्र कांग्रेस सरकार की निवास नीति के खिलाफ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अभियान को एक नए स्तर पर ले जाता है, जिससे यह मुद्दा राज्य-स्तर के राजनीतिक विवाद से हटकर संवैधानिक और सुरक्षा के आधार पर केंद्र की जांच के दायरे में आ गया है।

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