नयी दिल्ली , जनवरी 19 -- नयी दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 का 53वां संस्करण साहित्यिक और शैक्षिक आदान-प्रदान के एक जीवंत केंद्र के रूप में उभरा है, जिसने पूरे भारत और दुनिया भर से प्रकाशकों, लेखकों, शिक्षकों और पाठकों को आकर्षित किया है।
पुस्तक मेले में बड़ी संख्या में आगंतुक आए, जिसका श्रेय मुफ्त प्रवेश और सही समय पर रखे गए नौ-दिवसीय कार्यक्रम को जाता है। प्रकाशकों ने देखा कि पाठक लोकप्रिय बेस्टसेलर से लेकर विशेष शैक्षणिक और क्षेत्रीय भाषा की किताबों तक, किताबों की एक विस्तृत शृंखला को देखने में गहरी दिलचस्पी ले रहे हैं। कुल 35 से अधिक देशों के 1,000 से अधिक प्रकाशकों ने इस मेले में भाग लिया, जिससे यह देश के सबसे बड़े साहित्यिक आयोजनों में से एक बन गया है।
राष्ट्रीय बुक ट्रस्ट के तत्वाधान में आयोजित इस मेले का उद्घाटन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने किया। इस साल की थीम, "भारतीय सैन्य इतिहास: वीरता और ज्ञान के 75 साल" को थीम पवेलियन में प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया है, जिसमें 500 से अधिक किताबें हैं और 100 से अधिक थीम-आधारित कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
मेले का उल्लेखनीय आकर्षण राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय रहा। यह एक डिजिटल लाइब्रेरी है जो 6,000 मुफ्त ई-बुक्स तक पहुंच प्रदान करती है, जो पारंपरिक पुस्तक संस्कृति को डिजिटल नवाचार के साथ मिलाती है। शिक्षा, संस्कृति और पहुंच पर अपने ज़ोर के साथ, नयी दिल्ली विश्व पुस्तक मेले ने न सिर्फ साहित्य का जश्न मनाया, बल्कि भारत के समृद्ध पठन पारिस्थितिकी तंत्र को भी मजबूत किया।
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