रांची , मार्च 17 -- झारखंड के रांची में शैक्षणिक संस्थानों में जातीय भेदभाव के खिलाफ सशक्त यूजीसी समता विनियम लागू करने की मांग और न्यायिक सुनवाई के मद्देनजर ऑल इंडिया फोरम फॉर इक्विटी के आह्वान पर आज यहां "राजभवन मार्च" निकाला गया।

यह मार्च रांची विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन से राजभवन तक गया। इस मार्च में जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष कॉमरेड नीतीश और जेएनयू के 14 जेल गए छात्रों में शामिल कॉमरेड मणिकांत पटेल वक्ता के रूप शामिल हुए।

ज्ञातव्य हो कि जेएनयू छात्रसंघ ने जेएनयू कुलपति के उस बयान का विरोध किया, जिसमें उन्होंने वंचित समुदायों, खासकर दलित और ब्लैक लोगों पर "विक्टिम कार्ड" खेलने का आरोप लगाया था। साथ ही, जातीय भेदभाव के मुद्दों को नजरअंदाज करते हुए दलित, आदिवासी और पिछड़े समुदायों के छात्रों की मूल समस्याओं के समाधान पर कोई ठोस पहल नहीं की गई। कुलपति की जातिवादी, मनुवादी और ब्राह्मणवादी मानसिकता के खिलाफ उन्हें हटाने की मांग को लेकर "मिनिस्ट्री ऑफ एजुकेशन मार्च" का आह्वान किया गया था।

इस क्रम में 51 छात्रों को डिटेन किया गया, जिनमें से कुछ को छोड़ दिया गया, जबकि 14 छात्रों को तिहाड़ जेल भेज दिया गया। जेएनयू के इन 14 छात्रों के जेल से रिहा होने के बाद "जेएनयू 14 ऑन द रोड" कार्यक्रम के तहत देश के विभिन्न हिस्सों में कन्वेंशन, मार्च और विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें ये छात्र मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे हैं।

राजभवन मार्च को संबोधित करते हुए जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष नीतीश ने कहा कि आज देश में आदिवासी, दलित और पिछड़े समुदायों के छात्रों के साथ शैक्षणिक संस्थानों में जाति के आधार पर विभिन्न प्रकार के भेदभाव हो रहे हैं। कभी परीक्षा और इंटरव्यू में कम अंक देकर, तो कभी सभी तय मानकों को पूरा करने के बावजूद "योग्य उम्मीदवार नहीं मिले" जैसे बहाने बनाकर नामांकन और नौकरी से वंचित कर दिया जाता है।

यह सीधे-सीधे मनुवादी और ब्राह्मणवादी मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि इसके खिलाफ जेएनयू, दिल्ली, इलाहाबाद, पटना होते हुए रांची तक यूजीसी समता विनियम 2026 लागू करने की लड़ाई जारी है और यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक सुप्रीम कोर्ट का फैसला पक्ष में नहीं आता।

वहीं, यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन लागू करने की लड़ाई में तिहाड़ जेल गए जेएनयू आइसा एक्टिविस्ट मणिकांत पटेल ने कहा कि हमारी लड़ाई उस मानसिकता के खिलाफ है, जो जाति के आधार पर योग्यता को परिभाषित करती है और उसी आधार पर हर पद पर नियंत्रण बनाए रखना चाहती है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित