कोलकाता , सितंबर 10 -- पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने जादवपुर विश्वविद्यालय में कथित "राष्ट्र-विरोधी" गतिविधियों को लेकर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, वाम मोर्चा, जादवपुर विश्वविद्यालय तथा जादवपुर विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (जूटा) पर ज़बरदस्त हमला बोला और कहा कि उनकी सरकार इस प्रमुख संस्थान को देश या भारतीय संस्कृति के ख़िलाफ़ गतिविधियों का मंच नहीं बनने देगी।
राज्य विधानसभा के विशेष सत्र में 'पश्चिम बंगाल विश्वविद्यालय एवं कॉलेज प्रशासन और विनियमन संशोधन विधेयक, 2026' पर चर्चा के दौरान, श्री अधिकारी ने जादवपुर विश्वविद्यालय के वामपंथी झुकाव वाले शिक्षकों और छात्रों के एक वर्ग तथा जादवपुर विश्वविद्यालय शिक्षक संघ पर निशाना साधा।प्रस्तावित कानून का उल्लेख करते हुए उन्होंने जादवपुर विश्वविद्यालय को श्री अरबिंदो से जुड़ी संस्था करार दिया और कहा कि इसे उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित करने की कोशिश की जा रही है।
श्री अधिकारी ने कहा, "केंद्र सरकार इस उद्देश्य के लिए 1,000 करोड़ रुपये प्रदान करेगी जबकि राज्य सरकार 300 करोड़ रुपये देगी। लेकिन उस विश्वविद्यालय में, आप छात्रों को जबरन बाहर निकालेंगे और कहेंगे 'कश्मीर मांगे आज़ादी' और 'भारत तेरे टुकड़े होंगे' तो इन चीज़ों की अनुमति नहीं दी जायेगी।"उन्होंने माओवादी नेता किशनजी से जुड़े नारों और उनके महिमामंडन पर भी सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा, "आप कहते हैं 'लाल सलाम कॉमरेड किशनजी'। उसने 1,000 बेगुनाह लोगों और सिल्दा कैंप में 30 बेगुनाह जवानों की जान ली थी। इन माओवादियों ने एक नया देश बनाने की योजना बनायी थी। कोई उन्हें महिमामंडित करेगा तो यह सरकार ऐसा नहीं होने देगी।"मुख्यमंत्री ने प्रोफ़ेसरों के एक वर्ग पर आरोप लगाया कि वे राष्ट्रवादी विचारों वाले लोगों को चुन-चुनकर निशाना बनाते हैं और साथ ही अपनी वामपंथी पहचान का उपयोग कर निर्वाचित राज्य और केंद्र सरकारों को चुनौती देते हैं। उन्होंने कहा, "वास्तव में, जादवपुर में वामपंथ की आड़ में एक छोटा सा वर्ग देश-विरोधी और शिक्षा-विरोधी हो गया है। उन्होंने संवैधानिक रूप से चुनी गयी राज्य और केंद्र सरकारों को चुनौती दी है। अनुशासन लाने के लिए यह कानून ज़रूरी था।"श्री अधिकारी ने जूटा सदस्यों को चेतावनी भी दी और कहा कि सरकार उनकी पिछली गतिविधियों को जानती है। उन्होंने कहा, "हमारे पास जूटा के लोगों के किये गये कामों का पूरा इतिहास है कि उन्होंने कब और कहां क्या भूमिका निभायी।" उन्होंने हालांकि यह भी कहा कि सरकार का उद्देश्य प्रस्तावित कानून का इस्तेमाल शिक्षकों या कर्मचारियों को उनके पुराने जुड़ाव के कारण निशाना बनाने का नहीं है।
उन्होंने कहा, "वाम मोर्चा ने शिक्षा का 'अनिल-करण' किया और तृणमूल ने 'ममता-करण' किया। हम ऐसा नहीं करेंगे लेकिन राज्य में दो शिक्षा नीतियां नहीं होंगी।" उन्होंने आगे कहा कि जिन्हें इसे स्वीकार करने में कोई समस्या है, वे छोड़ सकते हैं।" इसके बजाय, उन्होंने सुझाव दिया कि स्थापित संस्थानों के अनुभवी शिक्षकों और कर्मचारियों का नए और कमज़ोर विश्वविद्यालयों में तबादला किया जा सकता है ताकि उन्हें मज़बूत बनाया जा सके।
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