नैनीताल , सितंबर 07 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की जनसभा के बाद सामने आये कथित शुद्धिकरण मामले को लेकर दायर जनहित याचिका पर सोमवार को सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता को कोई राहत नहीं देते हुए मामले को पूरी तरह से निस्तारित कर दिया है।

देहरादून निवासी डॉ. बैजनाथ की ओर से दायर जनहित याचिका पर न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ में सुनवाई हुई।

याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि कांग्रेस अध्यक्ष खरगे की आठ अगस्त को जनसभा के बाद संबंधित स्थल का शुद्धिकरण किया गया जो कि सामाजिक समरसता के खिलाफ है। प्रदेश सरकार इस मामले में लीपापोती कर रही है। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रही है।

दूसरी ओर राज्य सरकार की ओर से पेश महाधिवक्ता एसएन बाबुलकर ने कहा कि जनहित याचिका राजनीति से प्रेरित है। इसे राजनीतिक लाभ लेने के लिए दायर की गई है। याचिकाकर्ता का मामले से कोई सरोकार नहीं है। सिर्फ समाचार पत्रों और सोशल मीडिया में छपी खबरों को याचिका का आधार बनाया गया है।

याचिकाकर्ता की ओर से हालांकि कहा गया कि वह अनुसूचित जाति से संबद्ध है और उसका इस मामले से किसी न किसी रूप में सरोकार है। सरकार की ओर से कहा गया कि इस मामले में दो मामले दर्ज हैं। एक मामला हल्द्वानी में जबकि जीरो प्राथमिकी बेंगलुरु में दर्ज है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि दोनों मामले अलग-अलग हैं। अदालत के सख्त रुख को देखते हुए याचिकाकर्ता की ओर से मांग की गई इस प्रकरण से जुड़े साक्ष्यों जैसे सीसीटीवी फुटेज और वीडियो रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखा जाए और सरकार को जांच में तेजी लाने के निर्देश दिए जायें।

अंत में अदालत ने याचिकाकर्ता की मांग को नहीं माना और याचिका को पूरी तरह से निस्तारित करते हुए कहा कि पुलिस मामले की जांच कर रही है। हालांकि अदालत ने सुनवाई के दौरान सरकार को निष्पक्ष जांच की बात दोहराई।

उल्लेखनीय है कि याचिकाकर्ता की ओर से दायर याचिका में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने और इस प्रकरण से जुड़े सभी साक्ष्यों को सुरक्षित करने की मांग की गयी थी।

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