देहरादून , सितम्बर 06 -- उत्तराखंड के हल्द्वानी में शुद्धिकरण प्रकरण पर कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) दोनों पूरी तरह आक्रामक रुख अपना रही हैं। इसी क्रम में कांग्रेस सोमवार को शुद्धिकरण मामले में जहां अभी तक प्राथमिकी दर्ज नहीं किये जाने के खिलाफ मुख्यमंत्री आवास घेरने जा रही है तो वहीं भाजपा प्रदेश के अपने सभी संगठनात्मक जिलों में समरसता-सौहार्द संकल्प धरना देगी।
कैबिनेट मंत्री और भाजपा प्रवक्ता खजान दास ने रविवार को कहा कि देवभूमि की सामाजिक संस्कृति और सदियों पुरानी समरसतापूर्ण परंपराओं को समझे बिना छुआछूत जैसे गंभीर विषय को राजनीतिक हथियार बनाना कांग्रेस की संकीर्ण राजनीति का प्रमाण है। कांग्रेस को यह समझना चाहिए कि उत्तराखंड के सामाजिक ताने-बाने को जातीय संघर्ष में बदलने की कोशिश यहां की जनता स्वीकार नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को मुख्यमंत्री आवास के घेराव से पहले यह बताना चाहिए कि जब हल्द्वानी की घटना से भाजपा का कोई संबंध ही नहीं है, तो वह मुख्यमंत्री आवास का घेराव किस आधार पर कर रही है। कांग्रेस तथ्यों पर जवाब देने के बजाय सड़क पर राजनीतिक प्रदर्शन के जरिए इस पूरे प्रकरण को और तूल देने की कोशिश कर रही है। जिस घटना से भाजपा का कोई लेना-देना नहीं, उसके लिए मुख्यमंत्री आवास का घेराव करना कांग्रेस की राजनीतिक हताशा को ही दर्शाता है। कांग्रेस को पहले तथ्य स्पष्ट करने चाहिए, फिर राजनीति करनी चाहिए।
श्री दास ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी को दलित सम्मान पर भाषण देने से पहले कांग्रेस के अपने इतिहास और अपने आचरण का हिसाब देना चाहिए। कांग्रेस का दलित प्रेम आखिर चुनाव और प्रेस कॉन्फ्रेंस तक ही क्यों दिखाई देता है? जब सत्ता और संगठन में वास्तविक हिस्सेदारी की बात आती है, तब कांग्रेस का रवैया क्या रहा है, इसका जवाब कांग्रेस को देना चाहिए। उन्होंने कहा कि 1977 में बाबू जगजीवन राम का कांग्रेस से अलग होना हो या कांग्रेस के भीतर दलित नेताओं के साथ सामने आए कथित दुर्व्यवहार के मामले, कांग्रेस की कथनी और करनी में अंतर स्पष्ट दिखाई देता है। यह राजनीतिक घटनाक्रम इस सवाल को जन्म देता है कि दशकों तक कांग्रेस में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाने वाले इतने वरिष्ठ दलित नेता को सर्वोच्च नेतृत्व की दौड़ में वह अवसर क्यों नहीं मिला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सामाजिक न्याय की बात करती रही, लेकिन क्या उसने अपने भीतर दलित नेतृत्व को वास्तविक राजनीतिक अवसर दिया?मंत्री श्री दास ने कहा कि कांग्रेस को अपने वर्तमान राजनीतिक आचरण का भी जवाब देना चाहिए। उत्तराखंड में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य के कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने के बाद कांग्रेस भवन में उनकी तस्वीर के साथ कथित दुर्व्यवहार का मामला सामने आया था। राजस्थान के बीकानेर में टिकट वितरण के विवाद के दौरान कांग्रेस के जिलाध्यक्ष मदन गोपाल मेघवाल के साथ कथित मारपीट का मामला भी सामने आया। उन्होंने कहा कि ऐसे घटनाक्रमों के बीच कांग्रेस का दलित सम्मान का दावा कथनी और करनी के अंतर को सामने लाता है। उन्होंने कहा कि श्री गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद एक सामाजिक संस्था से जुड़े दलित युवाओं द्वारा अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई गई। कांग्रेस को यह भी बताना चाहिए कि जिन दलित युवाओं ने स्वयं को असुरक्षित महसूस करते हुए कानून का सहारा लिया, उनकी सुरक्षा और अधिकारों को लेकर उसने सार्वजनिक रूप से कितनी चिंता जताई? दलित सुरक्षा केवल राजनीतिक भाषणों का विषय नहीं हो सकती।
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