बीजिंग , मई 16 -- चीन ने शनिवार को राष्ट्रपति शी जिनपिंग और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुए शिखर सम्मेलन को एक "ऐतिहासिक बैठक" बताया है जो दुनिया की दो सबसे बड़ी शक्तियों के बीच संबंधों को फिर से परिभाषित कर सकती है। चीन के अनुसार, दोनों नेता "रणनीतिक स्थिरता के रचनात्मक चीन-अमेरिका संबंध" बनाने पर सहमत हुए हैं।
चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि दोनों नेताओं ने चीन-अमेरिका संबंधों और विश्व शांति व विकास से संबंधित प्रमुख मुद्दों पर खुले, गहन, रचनात्मक और रणनीतिक तरीके से लंबी चर्चा की।
श्री वांग ने कहा कि यह शिखर सम्मेलन द्विपक्षीय संबंधों में एक "नया शुरुआती बिंदु" है और यह दोनों देशों द्वारा एक-दूसरे के साथ तालमेल बिठाने का सही रास्ता खोजने के प्रयासों को दर्शाता है।
उल्लेखनीय है कि पिछले साल अक्टूबर में बुसान बैठक के बाद राष्ट्रपति शी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच यह पहली आमने-सामने की मुलाकात है और नौ वर्षों में किसी अमेरिकी राष्ट्रपति की यह पहली चीन यात्रा है।
बीजिंग शिखर सम्मेलन को एक निर्णायक मोड़ बताते हुए श्री वांग ने कहा कि इस बैठक ने दुनिया को एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है कि चीनी राष्ट्र का महान पुनरुद्धार और 'मेक अमेरिका ग्रेट अगेन' (मागा) एक साथ चल सकते हैं।
उन्होंने कहा कि दोनों देश एक-दूसरे की सफलता में मदद कर सकते हैं और पूरी दुनिया के कल्याण को आगे बढ़ा सकते हैं। श्री वांग के अनुसार, राष्ट्रपति शी ने वैश्विक व्यवस्था के भविष्य और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच चीन-अमेरिका संबंधों के बुनियादी सवालों पर इस शिखर सम्मेलन को केंद्रित किया।
श्री वांग ने श्री शी के हवाले से कहा कि दुनिया एक बार फिर चौराहे पर पहुंच गई है और ऐसे में उन्होंने वाशिंगटन के सामने कई सवाल रखे। इनमें सबसे प्रमुख यह था कि क्या चीन और अमेरिका 'थ्यूसीडाइड्स ट्रैप' से उबरकर बड़े देशों के संबंधों का एक नया प्रतिमान बना सकते हैं? क्या दोनों देश मिलकर वैश्विक चुनौतियों का सामना कर सकते हैं और मानवता के भविष्य के लिए एक उज्ज्वल मार्ग तैयार कर सकते हैं? श्री वांग ने कहा कि जब दोनों राष्ट्रपति चीन-अमेरिका संबंधों के विशाल जहाज के लिए दिशा तय करते हैं, तो वे मानव समाज के लिए भी सही रास्ता दिखा रहे होते हैं।
शिखर सम्मेलन की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि अगले तीन वर्षों और उससे आगे के लिए "रणनीतिक स्थिरता के रचनात्मक संबंधों" के ढांचे पर बनी सहमति रही। श्री वांग ने स्पष्ट किया कि न तो चीन और न ही अमेरिका एक-दूसरे को काट सकते हैं या एक-दूसरे के बिना समृद्ध हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि सहयोग से दोनों को लाभ होगा और टकराव से दोनों का नुकसान होगा।
श्री वांग ने इस बात पर भी जोर दिया कि दोनों शक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा को 'जीरो-सम गेम' (एक की जीत दूसरे की हार) नहीं बनना चाहिए। दोनों पक्ष कूटनीति, सैन्य संचार, अर्थव्यवस्था, व्यापार, कृषि, सार्वजनिक स्वास्थ्य, पर्यटन और कानून प्रवर्तन सहित जन-स्तर के आदान-प्रदान को विस्तार देने पर सहमत हुए हैं।
श्री वांग ने कहा, "अगर इसे (ताइवान मुद्दे को) ठीक से संभाला गया, तो कुल मिलाकर रिश्ते स्थिर रहेंगे। नहीं तो, दोनों देशों के बीच टकराव और यहां तक कि संघर्ष भी हो सकते हैं, और पूरा रिश्ता बहुत बड़े खतरे में पड़ जाएगा।"चर्चा में ताइवान का मुद्दा प्रमुखता से छाया रहा। श्री वांग ने दोहराया कि यह चीन-अमेरिका संबंधों में सबसे संवेदनशील बिंदु बना हुआ है। उन्होंने चेतावनी दी कि ताइवान की स्वतंत्रता और जलडमरूमध्य में शांति 'आग और पानी' की तरह हैं जो कभी एक साथ नहीं रह सकते।
उन्होंने अमेरिका से 'एक चीन' सिद्धांत और तीन संयुक्त घोषणापत्रों का कड़ाई से पालन करने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अमेरिकी पक्ष चीन की चिंताओं को गंभीरता से ले रहा है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की तरह वह भी ताइवान की स्वतंत्रता का समर्थन नहीं करता है।
शिखर सम्मेलन के दौरान पश्चिम एशिया, ईरान और यूक्रेन युद्ध जैसे वैश्विक मुद्दों पर भी ध्यान केंद्रित किया गया। मध्य पूर्व पर शी ने दोहराया कि बल प्रयोग से समस्याएं हल नहीं हो सकतीं और संवाद ही एकमात्र सही विकल्प है।
चीन ने परमाणु मुद्दे सहित अमेरिका-ईरान वार्ता जारी रखने का समर्थन किया और होर्मुज जलडमरूमध्य को जल्द से जल्द फिर से खोलने का आह्वान किया।
यूक्रेन के मुद्दे पर दोनों देशों ने संघर्ष को समाप्त करने और शांति वार्ता को बढ़ावा देने में रचनात्मक भूमिका निभाने की प्रतिबद्धता जताई।
आर्थिक और व्यापारिक मुद्दों पर भी सकारात्मक परिणाम निकले। दोनों पक्ष 'व्यापार बोर्ड' और 'निवेश बोर्ड' स्थापित करने, कृषि उत्पादों के लिए बाजार पहुंच की चिंताओं को दूर करने और पारस्परिक टैरिफ कटौती के तहत द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने पर सहमत हुए।
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