बैतूल , अप्रैल 08 -- मध्यप्रदेश में बैतूल जिले की माचना नदी पर प्रस्तावित 300 करोड़ रुपए की शीतलझिरी मध्यम सिंचाई परियोजना को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। भू-अर्जन प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोपों के बीच विषय विशेषज्ञ समिति के दो सदस्यों ने प्रस्ताव पर फर्जी हस्ताक्षर किए जाने की शिकायत पुलिस अधीक्षक से की है।
ग्राम पंचायत सेहरा के सरपंच और उपसरपंच ने आज एसपी कार्यालय पहुंचकर लिखित शिकायत सौंपी। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें समिति में शामिल तो किया गया, लेकिन किसी भी बैठक या निर्णय प्रक्रिया की जानकारी नहीं दी गई। इसके बावजूद उनके नाम से प्रस्ताव पारित कर उस पर हस्ताक्षर दर्शा दिए गए, जो उन्होंने कभी नहीं किए।
शिकायतकर्ताओं के अनुसार समिति का गठन प्रभावित लोगों के हितों की रक्षा, विस्थापन को न्यूनतम रखने, उचित मुआवजा दिलाने तथा पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया गया था। ऐसे में बिना जानकारी और सहमति के प्रस्ताव पारित होना गंभीर अनियमितता है।
इसी बीच परियोजना के विरोध में ग्रामीणों का आंदोलन भी जारी है। हाल ही में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया था। ग्रामीणों का कहना है कि परियोजना से लगभग 1200 एकड़ भूमि डूब क्षेत्र में आएगी, जिससे करीब 500 आदिवासी परिवार प्रभावित होंगे और 35 परिवारों के मकान विस्थापित होने का खतरा है।
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे एक आदिवासी नेता ने आरोप लगाया कि समिति में ऐसे लोगों को शामिल किया गया है जिनका स्थानीय ग्रामीणों से सीधा संबंध नहीं है और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव है।
इधर सिंचाई विभाग के कार्यपालन यंत्री ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि प्रक्रिया उपखंड स्तर पर पूरी कराई गई थी और मामला हाल ही में उनके संज्ञान में आया है। उन्होंने हस्ताक्षरों की जांच कराने का आश्वासन दिया है।
पुलिस अधीक्षक ने भी शिकायत की निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाते हुए कहा कि यदि फर्जी हस्ताक्षर या अन्य अनियमितता पाई जाती है तो संबंधितों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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