चंडीगढ़ , जून 06 -- सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, हरियाणा ने बाल स्वास्थ्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। राज्य की शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) घटकर प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर 24 रह गई है जो राष्ट्रीय औसत के बराबर है।
हरियाणा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ सुमिता मिश्रा ने शनिवार को बताया कि मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं में केंद्रित प्रयासों के कारण प्रमुख स्वास्थ्य संकेतकों में लगातार सुधार हो रहा है। पिछले पांच वर्षों में राज्य की शिशु मृत्यु दर 28 से घटकर 24 हो गई, जो लगभग 14 प्रतिशत की कमी है। इसी अवधि में पंजाब में यह दर 18 से घटकर 16 हुई जो करीब 11 प्रतिशत सुधार को दर्शाती है।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य अवसंरचना, संस्थागत प्रसव और नवजात देखभाल सेवाओं को मजबूत करने के कारण यह सफलता मिली है। राज्य में स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट्स (एसएनसीयू), न्यूबॉर्न स्टेबिलाइजेशन यूनिट्स, न्यूट्रिशन रिहैबिलिटेशन सेंटर, कंगारू मदर केयर सुविधाएं तथा होम-बेस्ड न्यूबॉर्न केयर सेवाओं का विस्तार किया गया है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार हरियाणा का प्रदर्शन कई बड़े राज्यों से बेहतर है। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में शिशु मृत्यु दर लगभग 35 तथा छत्तीसगढ़ में 36 प्रति 1,000 जीवित जन्म है।
राज्य सरकार अब अतिरिक्त एसएनसीयू, एनबीएसयू, एनआरसी और लैक्टेशन मैनेजमेंट यूनिट्स स्थापित करने की योजना पर कार्य कर रही है। साथ ही मौजूदा इकाइयों को मातृ एवं नवजात देखभाल इकाइयों में उन्नत किया जा रहा है।
पिछले एक दशक में हरियाणा ने शिशु मृत्यु दर को 41 से घटाकर 24 तक पहुंचाया है। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और सुदृढ़ कर आने वाले वर्षों में बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकेंगे।
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