सोलापुर , मार्च 21 -- महाराष्ट्र में शिवसेना (यूबीटी) ने 2014 के विवादास्पद "चेसिस क्रैक" बस घोटाले को लेकर शनिवार को यहां विरोध प्रदर्शन किया।

प्रदर्शनकारियों ने सोलापुर नगर निगम (एसएमसी) में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और प्रशासनिक विफलता का आरोप लगाते हुए सरकारी खजाने से 56 करोड़ रुपये की वसूली किये जाने को लेकर अपना विरोध दर्ज कराया। विरोध प्रदर्शन शहर प्रमुख महेश धाराशिवकर के नेतृत्व में ज़िला कलेक्टर कार्यालय के पास आयोजित किया गया। इसमें पार्टी के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया और नागरिक प्रशासन के खिलाफ नारे लगाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।

प्रदर्शनकारियों के अनुसार एमएमसी ने 2014 में अशोक लेलैंड से 144 बसें खरीदी थीं। अधिकारियों और कंपनी के बीच एक संदिग्ध समझौते के कारण बाद में 99 बसों की चेसिस में खराबी पाई गयी। क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) से फिटनेस प्रमाण होने के बावजूद, ये बसें इस्तेमाल के लायक नहीं निकलीं।

शिवसेना ने आरोप लगाया कि यह कोई तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साज़िश (घोटाला) थी। एक लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद, अब 56 करोड़ रुपये का आर्थिक बोझ नगर निगम के खजाने से यानी असल में टैक्स देने वालों से वसूल किया जाएगा। इससे नागरिकों और राजनीतिक नेताओं में ही भारी गुस्सा है। पार्टी ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग की है और चेतावनी दी है कि अगर न्याय नहीं मिला, तो वे अपना आंदोलन और तेज़ करेंगे।

इस कदम पर सवाल उठाते हुए श्री धाराशिवकर ने कहा, "भ्रष्ट अधिकारियों की गलतियों की सज़ा सोलापुर के नागरिकों को क्यों भुगतनी पड़े? जुर्माना उन लोगों से वसूला जाना चाहिए जिन्होंने घटिया बसों को मंज़ूरी दी और उन्हें स्वीकार किया, न कि आम जनता से।हम भ्रष्टाचार की वजह से जनता के पैसे की लूट होने नहीं देंगे। यह सोलापुर के नागरिकों के अधिकारों की लड़ाई है।"शिवसेना नेताओं ने कहा कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक जवाबदेही तय नहीं हो जाती और आर्थिक बोझ जनता से हटाकर उस कथित घोटाले के लिए ज़िम्मेदार लोगों पर नहीं डाल दिया जाता।

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