फगवाड़ा , जून 04 -- पंजाब में जालंधर के श्री देवी तालाब मंदिर, अमृतसर के दुर्गाना मंदिर और पटियाला के काली माता मंदिर सहित प्रमुख धार्मिक स्थलों को कथित तौर पर निशाना बनाकर भेजे गये धमकी भरे ई-मेल की खबरों के बाद पंजाब के विभिन्न हिंदू संगठनों ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। शिवसेना पंजाब और शिवसेना (यूबीटी) पंजाब के नेताओं ने इस धमकी की निंदा करते हुए इसे सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने और श्रद्धालुओं में भय पैदा करने का प्रयास बताया है।
शिवसेना पंजाब के वरिष्ठ उपाध्यक्ष इंदरजीत करवल और राजेश पाल्टा ने राज्य प्रवक्ता विपिन शर्मा के साथ मिलकर इस धमकी को बेहद निंदनीय बताया और ऑपरेशन ब्लू स्टार से जुड़ी ऐतिहासिक घटनाओं के नाम पर हिंदू मंदिरों को निशाना बनाने के औचित्य पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि पंजाब लंबे समय से हिंदू-सिख एकता और भाईचारे का प्रतीक रहा है और आरोप लगाया कि कुछ राष्ट्रविरोधी तत्व समुदायों के बीच फूट डालने की कोशिश कर रहे हैं।
नेताओं ने इस बात पर ज़ोर दिया कि हिंदू और सिख समुदायों के बीच गहरा सांस्कृतिक और ऐतिहासिक बंधन है और राज्य के सामाजिक ताने-बाने को बिगाड़ने के प्रयासों के खिलाफ चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि धार्मिक पूजा स्थलों को राजनीतिक या वैचारिक संघर्षों से दूर रखा जाना चाहिए और नफरत और फूट फैलाने के प्रयासों के खिलाफ सामूहिक सतर्कता का आह्वान किया।
इस धमकी के सुरक्षा संबंधी गंभीर परिणामों पर चिंता व्यक्त करते हुए, शिवसेना नेताओं ने केंद्र सरकार और जांच एजेंसियों से ई-मेल भेजने के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान करने और उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने का आग्रह किया। उन्होंने धमकी के पीछे संभावित नेटवर्क की गहन जांच की भी मांग की और पंजाब भर के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने का आह्वान किया।
इसी बीच, शिवसेना (यूबीटी) पंजाब के राज्य प्रेस सचिव कमल सरोज ने भी इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कथित धमकी को न केवल धार्मिक संस्थानों पर हमला बताया, बल्कि पंजाब की शांति, सांप्रदायिक सद्भाव और सामाजिक एकता की परंपरा पर भी प्रहार बताया। उन्होंने कहा कि पूजा स्थलों को निशाना बनाने या समुदायों के बीच तनाव पैदा करने के किसी भी प्रयास से कानून के तहत सख्ती से निपटा जाना चाहिए।
श्री सरोज ने कहा कि श्री हरमंदिर साहिब में 1984 के सैन्य अभियान से संबंधित स्मृति समारोहों के कारण वर्तमान समय सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि विदेशों से सक्रिय भारत विरोधी और अलगाववादी तत्वों ने पंजाब में माहौल बिगाड़ने और सांप्रदायिक सद्भाव को कमजोर करने के लिए बार-बार ऐसे अवसरों का फायदा उठाने की कोशिश की है। उन्होंने सतर्कता बढ़ाने का आह्वान करते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय और राष्ट्रीय जांच एजेंसियों से इस मामले की उच्च स्तरीय जांच करने और राज्य भर के प्रमुख मंदिरों, गुरुद्वारों और अन्य धार्मिक संस्थानों में सुरक्षा बढ़ाने का आग्रह किया। उन्होंने जनता से शांति बनाये रखने, अफवाहों से बचने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत कानून प्रवर्तन एजेंसियों को देने की अपील भी की।
सभी नेताओं ने सामूहिक रूप से इस बात पर जोर दिया कि पंजाब की एकता, भाईचारा और सांप्रदायिक सद्भाव को हर कीमत पर संरक्षित किया जाना चाहिए और विश्वास व्यक्त किया कि विभाजनकारी ताकतें राज्य के शांतिपूर्ण सामाजिक वातावरण को बिगाड़ने में सफल नहीं होंगी।
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