नागपुर , सितंबर 09 -- शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने बुधवार को पार्टी के 'धनुष-बाण' चुनाव चिह्न के विवाद पर तुरंत फैसला सुनाने की मांग की।

उन्होंने आरोप लगाया कि बालासाहेब ठाकरे के स्थापित मूल शिवसेना का प्रतीक चिह्न एक साजिश के तहत चुराया गया था और इसे विरोधी एकनाथ शिंदे गुट के पास नहीं रहना चाहिए।

यहां पत्रकारों को संबोधित करते हुए श्री राउत ने कहा कि 'धनुष-बाण' बालासाहेब ठाकरे की शिवसेना का पारंपरिक प्रतीक था और इसका शिंदे गुट से कोई लेना-देना नहीं है।

उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के जरिये यह चुनाव चिह्न छीन लिया गया और इस मामले का निपटारा जल्द से जल्द किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि जब चोरी की संपत्ति विवादित होती है तो आमतौर पर अधिकारी उसे जब्त कर लेते हैं, इसलिए यह चुनाव चिह्न उन लोगों के कब्जे में नहीं रहना चाहिए जिन पर इसे छीनने का आरोप है।

उन्होंने शिंदे गुट का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ताओं पर कानूनी कार्यवाही में देरी करने की रणनीति अपनाने का आरोप लगाया और जल्द फैसले के लिए रोजाना सुनवाई की मांग की।

महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर के दलबदल विरोधी कानून पर दी गयी टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए श्री राउत ने कहा कि श्री नार्वेकर के लिए इस तरह के बयान देना अनुचित है। उन्होंने इसे कानून की मूल भावना का अपमान करार दिया।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के भीतर पुनर्मिलन की संभावना पर राकांपा (शरदचंद्र पवार) नेता रोहित पवार के बयानों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए श्री राउत ने कहा कि शरद पवार पार्टी के सर्वमान्य नेता हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि वह कभी भी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ हाथ नहीं मिलायेंगे। उन्होंने आगे कहा कि कोई भी विलय एकतरफा प्रक्रिया नहीं हो सकता।

श्री राउत ने राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष प्यारे खान की नियुक्ति पर भी सवाल उठाये और मुंबई बम विस्फोटों के दोषी अबू सलेम से जेल में श्री खान की मुलाकात की रिपोर्टों पर राज्य सरकार से जवाब मांगा।

उन्होंने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए कहा कि सरकार को इस पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।

मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल के मुद्दे पर श्री राउत ने आरोप लगाया कि सरकार ने उनके आंदोलन से राजनीतिक लाभ उठाया और बाद में उनकी मांगों से दूरी बना ली।

श्री जरांगे के बिगड़ते स्वास्थ्य पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने सरकार से उनसे बातचीत करने का आग्रह किया। साथ ही, उन्होंने मराठा और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) दोनों समुदायों के मुद्दों को सुलझाने के लिए एक सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की।

उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की भी आलोचना की और आरोप लगाया कि यह विपक्षी नेताओं के खिलाफ चुनिंदा कार्रवाई कर रहा है, जबकि अन्य अनियमितताओं की जांच में इसकी भूमिका संदिग्ध है।

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