चेन्नई , मार्च 07 -- केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को कहा कि नारियल किसानों की मदद के लिए सरकार इसकी खेती को लेकर एकीकृत नजरिए अपनाएगी।
श्री चौहान यहाँ आईआईटी मद्रास रिसर्च पार्क में 'नारियल प्रोत्साहन योजना' पर आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय हितधारक बैठक के उद्घाटन के अवसर पर लोगों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने नारियल की खेती को बढ़ावा देने के मकसद से बनी इस योजना के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए नीतिगत दृष्टिकोण अपनाने पर बल दिया और देश भर से आए नारियल किसान नेताओं के साथ सीधा संवाद किया।
गौरतलब है कि केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य भारत के नारियल क्षेत्र का पुनरुद्धार और सतत विकास सुनिश्चित करना है। नारियल की खेती लगभग 3 करोड़ लोगों की आजीविका का आधार है।
श्री चौहान ने कहा कि यह योजना गिरती पैदावार, पुराने पड़ चुके बागानों, कीटों के प्रकोप और गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री की कमी जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए एक एकीकृत दृष्टिकोण अपनाएगी। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत गुणवत्तापूर्ण पौधों का बड़े पैमाने पर उत्पादन, नए क्षेत्रों में खेती का विस्तार और निर्यात को मजबूत करने के लिए प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना जैसे प्रमुख कदम उठाये जाएंगे।
सम्मेलन में केंद्रीय कृषि सचिव, प्रमुख नारियल उत्पादक दक्षिणी राज्यों के कृषि एवं बागवानी सचिवों और नारियल विकास बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में देश भर के 1,000 से अधिक नारियल किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), शोधकर्ताओं और उद्यमियों ने भाग लेकर जमीनी स्तर की चुनौतियों और अनुभवों को साझा किया। बैठक का मुख्य लक्ष्य केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग को मजबूत बनाना था ताकि 2030 के दशक तक देश को नारियल और जूट उत्पादों के निर्यात में वैश्विक नेतृत्वकर्ता बनाया जा सके। राज्य सरकारों ने भी अपनी विशिष्ट रणनीतियाँ प्रस्तुत कीं, जिसका उद्देश्य किसानों की आय में वृद्धि करना और इस क्षेत्र को अधिक लचीला बनाना है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित