वाराणसी , फरवरी 26 -- केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को वाराणसी स्थित भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान परिसर में रक्त-चंदन का पौधरोपण किया और वैज्ञानिकों के साथ समीक्षा बैठक की। उन्होंने कहा कि सब्जी उत्पादन की गुणवत्ता और उत्पादकता बढ़ाने के लिए कृषि वैज्ञानिकों और किसानों के बीच निरंतर समन्वय आवश्यक है। उन्नत तकनीकों को शीघ्रता से खेतों तक पहुंचाने पर विशेष जोर देते हुए उन्होंने वैज्ञानिकों से व्यावहारिक अनुसंधान को बढ़ावा देने का आह्वान किया।
प्रक्षेत्र भ्रमण के दौरान केंद्रीय मंत्री ने किसानों से बीजों की उपलब्धता, गुणवत्ता, उत्पादन लागत कम करने के उपायों और आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर संवाद किया। वैज्ञानिकों ने ग्राफ्टेड बैंगन-टमाटर (ब्रिमेटो) और आलू-टमाटर (पोमेटो) जैसी तकनीकों पर प्रस्तुति दी, जिसकी मंत्री ने सराहना करते हुए निर्देश दिया कि इन नवाचारों का लाभ शीघ्र किसानों तक पहुंचे। उन्होंने 'हाई-टेक नर्सरी' की उपयोगिता रेखांकित करते हुए एफपीओ के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण पौध एवं बीज उपलब्ध कराने की आवश्यकता बताई।
मंत्री ने टमाटर सहित अन्य सब्जियों की शेल्फ लाइफ बढ़ाने, प्रसंस्करण योग्य किस्मों के विकास, निर्यातोन्मुखी उत्पादन तथा जैविक खेती को प्रोत्साहन देने पर बल दिया। संस्थान द्वारा विकसित सूक्ष्मजीव जैव उर्वरक, बायो-स्टिमुलेंट और बायोपेस्टिसाइड उत्पादों का भी अवलोकन किया गया।
उन्होंने संस्थान को स्टार्टअप्स और युवाओं को कृषि-उद्यमिता से जोड़ने की दिशा में तेज़ी से कार्य करने का सुझाव दिया। साथ ही आगामी रबी सत्र के लिए क्षेत्रवार कार्ययोजना बनाने और जलवायु परिवर्तन के अनुरूप सब्जी उत्पादन प्रणाली विकसित करने पर जोर दिया।
बैठक में संस्थान के निदेशक डॉ. राजेश कुमार ने उपलब्धियों की जानकारी दी और बताया कि सब्जी निर्यात बढ़ाने के लिए किसानों को निरंतर तकनीकी सहायता दी जा रही है। इस अवसर पर आईसीएआर के सहायक महानिदेशक डॉ. सुधाकर पांडेय भी उपस्थित रहे।
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