बेंगलुरु , जून 19 -- कर्नाटक विधान परिषद चुनावों में क्रॉस-वोटिंग विवाद के बीच कर्नाटक के लोक निर्माण मंत्री सतीश जरकीहोली ने दावा किया है कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने चुनावों में कांग्रेस पार्टी की प्रचंड जीत सुनिश्चित करने के लिए भाजपा की ही राजनीतिक रणनीति का सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया है।
जब राज्य की राजनीति में क्रॉस-वोटिंग और पर्दे के पीछे की जोड़-तोड़ की चर्चाएं सबसे ज्यादा गर्म थीं, तब शुक्रवार को श्री जरकीहोली ने दावा किया कि कांग्रेस ने भाजपा चुनाव प्रबंधन के 'दिल्ली मॉडल' को अपनाकर अपने विरोधियों का पासा पलट दिया।
श्री जरकीहोली ने यहां संवाददाताओं से कहा, "जो दिल्ली में होता रहा है, वह अब कर्नाटक में हुआ है। हमारे मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने भाजपा मॉडल अपनाया है। पहली बार, कांग्रेस ने भाजपा की रणनीति का इस्तेमाल किया है और सफलता हासिल की है।" उनकी यह टिप्पणी परिषद चुनावों में बड़े पैमाने पर हुई क्रॉस-वोटिंग के एक दिन बाद आयी है। इस क्रॉस-वोटिंग के कारण कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार विधानसभा में पार्टी की वास्तविक संख्या बल से कहीं अधिक वोट हासिल करने में सफल रहे। इस परिणाम के चलते जेडीएस उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा, जबकि पार्टी को अपनी सहयोगी भाजपा का समर्थन हासिल था।
श्री जरकीहोली ने खुले तौर पर स्वीकार किया कि कांग्रेस को अपनी उम्मीद से ज्यादा वोटों का फायदा मिला है। उन्होंने एक सुनियोजित चुनावी रणनीति को अंजाम देने का श्रेय श्री शिवकुमार के अलावा केपीसीसी अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद और कर्नाटक कांग्रेस प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला को दिया। उन्होंने कहा, "दोनों तरफ से क्रॉस-वोटिंग हुई थी। हमें वे वोट मिले जो हमारे नहीं थे। श्री शिवकुमार, श्री हरिप्रसाद और श्री रणदीप सिंह सुरजेवाला का प्रयास रंग लाया है।"विधायकों की खरीद-फरोख्त के विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि विधायकों ने वफादारी बदलने के किसी लालच में आये बिना अपनी अंतरात्मा की आवाज पर वोट दिया था। उन्होंने अपनी बात पर कायम रहते हुए कहा, "इसे खरीद-फरोख्त नहीं कहा जा सकता। कुछ लोगों ने मित्रता के कारण, कुछ ने राजनीतिक संबंधों के कारण और कुछ ने अपने नेतृत्व से असंतोष के कारण वोट दिया होगा। ये अंतरात्मा की आवाज पर दिये गये वोट हैं।"बड़ा दावा करते हुए श्री जरकीहोली ने संकेत दिया कि भाजपा और जेडीएस दोनों के विधायकों ने पार्टी लाइन से अलग हटकर कांग्रेस के पक्ष में मतदान किया था। उन्होंने कहा, "आने वाले दिनों में सब कुछ साफ हो जायेगा। किसने वोट दिया, क्यों दिया और किन कारणों ने उन्हें प्रभावित किया, यह सब पता चल जायेगा।" मंत्री ने दावा किया कि कांग्रेस को केवल कुछ अतिरिक्त वोटों की उम्मीद थी, लेकिन अंततः मिले बड़े पैमाने के समर्थन से वह खुद भी हैरान थी। उन्होंने कहा, "हमने चार या पांच अतिरिक्त वोटों का अनुमान लगाया था। जो समर्थन मिला, वह उम्मीद से कहीं ज्यादा था।"भाजपा पर निशाना साधते हुए श्री जरकीहोली ने आरोप लगाया कि इस अप्रत्याशित परिणाम के पीछे भाजपा नेतृत्व के भीतर का भ्रम भी बड़ा कारण था।उन्होंने कहा, "भाजपा में शुरू से ही भ्रम की स्थिति रही है। कांग्रेस ने इस अवसर का प्रभावी ढंग से लाभ उठाया और आगे बढ़ गयी।" कांग्रेस ने जिन पांच विधान परिषद सीटों पर चुनाव लड़ा था, उन सभी पर जीत हासिल की है, जबकि भाजपा को दो सीटें मिलीं हैं।
भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन का समर्थन होने के बावजूद जेडीएस उम्मीदवार की हार ने राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। इसके बाद दोनों विपक्षी दलों ने क्रॉस-वोटिंग के संदिग्ध विधायकों की पहचान करने के लिए आंतरिक जांच शुरू कर दी है।
श्री जरकीहोली की टिप्पणियों से विवाद और गहराने की आशंका है, क्योंकि यह किसी वरिष्ठ कांग्रेस नेता का अब तक की सबसे स्पष्ट स्वीकारोक्ति है कि सत्तारूढ़ पार्टी को परिषद चुनावों में मिली इस जोरदार जीत में रणनीति के तहत दूसरी पार्टियों से मिले समर्थन ने निर्णायक भूमिका निभायी।
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