बेंगलुरु , अगस्त 08 -- कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने राज्य मंत्रिमंडल में किसी महिला को शामिल नहीं किये जाने को लेकर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू की आलोचना पर पलटवार करते हुए केंद्र को महिला राजनीतिक प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर कर्नाटक को नसीहत देने से पहले अपने रिकॉर्ड पर गौर करने को कहा।

हाल में कर्नाटक मंत्रिमंडल के विस्तार के बाद श्री रिजिजू ने राज्य मंत्रिमंडल में एक भी महिला को शामिल नहीं किए जाने पर सवाल उठाया था। विस्तार में 19 मंत्रियों को शामिल किया गया था, लेकिन इनमें कोई महिला नहीं थी।

श्री शिवकुमार ने श्री रिजिजू की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्र के महिला प्रतिनिधित्व के रिकॉर्ड पर सवाल उठाया और कहा कि इस मुद्दे को केवल मंत्रिमंडल में महिलाओं की मौजूदगी तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता।

हाल के मंत्रिमंडल विस्तार में एक भी महिला को शामिल नहीं किया जाना अब कर्नाटक की राजनीति में प्रमुख मुद्दा बन गया है। मंत्रिमंडल विस्तार का उद्देश्य कई दावेदारों को समायोजित करने तथा क्षेत्रीय और राजनीतिक संतुलन साधने का था, लेकिन महिला प्रतिनिधित्व का अभाव अब सरकार के लिए राजनीतिक चुनौती बन गया है।

इस मुद्दे ने सत्तारूढ़ कांग्रेस के लिए भी असहज स्थिति पैदा की है। पार्टी लगातार महिला सशक्तीकरण पर जोर देती रही है, लेकिन नए मंत्रिमंडल में एक भी महिला को जगह नहीं मिली है। कांग्रेस विधायक नयना मोटम्मा ने भी मंत्रिमंडल में महिलाओं को प्रतिनिधित्व नहीं मिलने पर निराशा जताई है। इससे इस मुद्दे को पार्टी के भीतर भी आवाज मिल गयी है।

भाजपा अब इस मुद्दे को कांग्रेस सरकार की महिला राजनीतिक प्रतिनिधित्व के प्रति प्रतिबद्धता पर सवाल उठाने के लिए इस्तेमाल करने की तैयारी में है। वहीं, श्री शिवकुमार की प्रतिक्रिया से विवाद का केंद्र राज्य सरकार से हटकर केंद्र और भाजपा के रिकॉर्ड की ओर भी चला गया है।

मंत्रिमंडल में महिला प्रतिनिधित्व का मुद्दा अब केवल कर्नाटक सरकार के मंत्रिमंडल गठन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि कांग्रेस और भाजपा के बीच व्यापक राजनीतिक बहस का रूप लेता दिख रहा है। कर्नाटक मंत्रिमंडल के हालिया विस्तार के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि महिला सशक्तीकरण की बात करने वाली कांग्रेस सरकार के मंत्रिमंडल में एक भी महिला को स्थान क्यों नहीं मिला।

इस बीच, भाजपा के लिए यह मुद्दा कांग्रेस सरकार को घेरने का एक नया अवसर बन गया है, जबकि श्री शिवकुमार के पलटवार ने केंद्र के समक्ष भी महिला राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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