नयी दिल्ली , अक्टूबर 03 -- उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने सोमवार को कहा कि शिक्षा को चरित्र निर्माण के साथ-साथ चलना चाहिए और यह एक सार्थक और संपूर्ण जीवन का सच्चा आधार है।
श्री राधाकृष्णन ने आज कोल्लम स्थित फातिमा माता राष्ट्रीय महाविद्यालय के हीरक जयंती समारोह में अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा को चरित्र निर्माण के साथ-साथ चलना चाहिए और यही एक सार्थक और संपूर्ण जीवन का सच्चा आधार है। उन्होंने कहा कि एक महान, सशक्त और करुणामयी समाज के निर्माण के लिए मानव-निर्माण सबसे महत्वपूर्ण आधार है।
उन्होंने शिक्षा की आधारशिला के रूप में चरित्र निर्माण के महत्व पर ज़ोर दिया और संस्थान की न केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता, बल्कि आत्म-अनुशासन, दूसरों की सेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व के मूल्यों को पोषित करने के लिए भी सराहना की। ये ऐसे गुण हैं जो राष्ट्रीय प्रगति में योगदान देने योग्य नागरिकों का निर्माण करते हैं।
श्री राधाकृष्णन ने याद दिलाया कि 75 साल पहले, शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना के लिए धन की बजाय साहस, विश्वास और सामुदायिक भावना की आवश्यकता होती थी। उन्होंने ज्ञान और सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रतीक के रूप में उस विरासत को कायम रखने के लिए फातिमा माता राष्ट्रीय महाविद्यालय की सराहना की।
उपराष्ट्रपति ने नशे से मुक्ति" जन आंदोलन का पुरज़ोर आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नशीली दवाओं का खतरा दुनिया भर में युवाओं के सामने सबसे गंभीर चुनौतियों में से एक है, जिससे व्यक्ति और समाज दोनों को अपूरणीय क्षति हो रही है। उन्होंने अभिभावकों, शिक्षकों और छात्रों से नशीली दवाओं और शराब का त्याग करने में एकजुट होने का आग्रह किया और कहा कि नशामुक्त जीवनशैली शारीरिक स्वास्थ्य, नैतिक बल तथा सामाजिक सद्भाव के लिए आवश्यक है।
उन्होंने नशे से मुक्ति अभियान को जन-जन द्वारा संचालित एक जन आंदोलन बनाने का संकल्प व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा एक व्यक्ति के पास सबसे बड़ी संपत्ति है। उन्होंने छात्रों को अनुशासन विकसित करने, व्यवस्थित दिनचर्या का पालन करने और सीखने के प्रति आजीवन प्रतिबद्धता बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित किया।
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