पटना , फरवरी 19 -- बिहार विधानसभा ने गुरुवार को वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए शिक्षा विभाग के 60,204.60 करोड़ रुपये के बजट को ध्वनिमत से पारित कर दिया।

मंत्री सुनील कुमार ने शिक्षा विभाग की बजटीय मांगों पर चर्चा का जवाब देते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के महत्व पर जोर दिया और इसे शिक्षा में शामिल करने की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि आने वाला दौर एआई संचालित होगा और राज्य सरकार ने विद्यार्थियों को इस बदलाव के लिए तैयार करने की दिशा में जरूरी कदम उठाए हैं। उन्होंने बताया कि इस वर्ष जनवरी में एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जिसके तहत राज्य के इंजीनियरिंग कॉलेजों में एआई की शिक्षा निःशुल्क दी जाएगी। उन्होंने कहा कि इससे विद्यार्थियों के कौशल में वृद्धि होगी और उन्हें रोजगार मिलने की संभावनाएं भी बढ़ेगी।

मंत्री श्री कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार शिक्षित और विकसित बिहार के सपने को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि शिक्षा समाज के आर्थिक, सामाजिक और समग्र विकास का प्रमुख साधन है और प्रगतिशील शिक्षा नीतियों और कल्याणकारी योजनाओं के कारण इस क्षेत्र में राज्य ने उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने कहा कि तकनीक के बढ़ते उपयोग से विद्यार्थी भविष्य में नौकरी पाने, व्यवसाय शुरू करने और स्टार्टअप स्थापित करने में ज्यादा सक्षमता प्राप्त करेंगे।

शिक्षा मंत्री ने बिहार की समृद्ध शैक्षणिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि नालंदा और विक्रमशीला जैसे प्राचीन शैक्षिक केंन्द्रों ने इस क्षेत्र को वैश्विक पहचान दिलाई थी और सरकार शिक्षा को फिर उसी ऊंचाई तक ले जाने का लक्ष्य रखती है। उन्होंने कहा कि सरकार "उज्ज्वल भविष्य के लिए उन्नत शिक्षा" के दृष्टिकोण के साथ दीर्घकालिक रोडमैप पर काम कर रही है। उन्होंने घोषणा की कि प्रत्येक प्रखंड में एक मॉडल स्कूल और कम से कम एक डिग्री कॉलेज स्थापित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा विभाग को अलग कर बुनियादी शिक्षा के विकास के लिए केंद्रित रूप से कार्य किया जा रहा है तथा 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' और 'एजुकेशन सिटी' जैसी योजनाओं पर काम किया जा रहा है।

श्री कुमार ने बजट में वृद्धि को रेखांकित करते हुए कहा कि वर्ष 2005 में शिक्षा बजट लगभग 4,400 करोड़ रुपये का था, जबकि वर्तमान में यह राज्य के कुल वार्षिक बजट का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा है, जो राष्ट्रीय औसत लगभग 14 प्रतिशत से अधिक है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पहल पर प्रत्येक एक किलोमीटर पर प्राथमिक विद्यालय, तीन किलोमीटर पर माध्यमिक विद्यालय और प्रत्येक पंचायत में प्लस-टू विद्यालय की योजना सुनिश्चित जा रही हैं।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित