नयी दिल्ली , अगस्त 07 -- केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने शुक्रवार को कहा कि शिक्षा समावेशी विकास और साझा समृद्धि की आधारशिला है तथा शिक्षा प्रणालियों को नवाचार के साथ-साथ मानवीय मूल्यों पर आधारित होना चाहिए।

श्री जोशी ने भुवनेश्वर में आयोजित 13वीं ब्रिक्स शिक्षा मंत्रियों की बैठक में आज शिक्षा के क्षेत्र में भारत की "जन-केंद्रित और मानवता-प्रथम" दृष्टिकोण के प्रति प्रतिबद्धता दोहरायी। बैठक के समापन पर 13वीं ब्रिक्स शिक्षा मंत्रियों की घोषणा को सर्वसम्मति से अपनाया गया। उन्होंने कहा कि शिक्षा समावेशी विकास और साझा समृद्धि की आधारशिला है तथा शिक्षा प्रणालियों को नवाचार के साथ-साथ मानवीय मूल्यों पर आधारित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि नीति निर्माण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के केंद्र में विद्यार्थी, शिक्षक, शोधकर्ता और युवा होने चाहिए।

उन्होंने पारंपरिक और स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों के संरक्षण और संवर्धन पर बल देते हुए कहा कि ब्रिक्स देशों की समृद्ध सभ्यतागत विरासत भविष्य की पीढ़ियों के लिए महत्वपूर्ण धरोहर है। उन्होंने ओडिशा की प्राचीन शिक्षा परंपरा और भारत के "अतिथि देवो भव" तथा "वसुधैव कुटुम्बकम्" जैसे मूल्यों का भी उल्लेख किया।

बैठक में ब्राजील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका, इंडोनेशिया, ईरान, इथियोपिया और संयुक्त अरब अमीरात सहित सभी ब्रिक्स सदस्य देशों के मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और प्रतिनिधि शामिल हुए। घोषणा-पत्र में भारत की अध्यक्षता के तहत तय पांच प्राथमिक क्षेत्रों पर साझा रोडमैप अपनाया गया। इनमें प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा () तथा आधारभूत साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान को मजबूत करना, कौशल विकास और तकनीकी-व्यावसायिक शिक्षा में सहयोग बढ़ाना, शोध, नवाचार और स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को प्रोत्साहन देना, शैक्षणिक योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता को आगे बढ़ाना तथा शैक्षणिक नेतृत्व और संस्थागत क्षमता निर्माण को सुदृढ़ करना शामिल है।

बैठक में शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के सुरक्षित, नैतिक और मानव-केंद्रित उपयोग को बढ़ावा देने, संयुक्त शोध परियोजनाओं, ब्रिक्स विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने तथा पारंपरिक एवं स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों पर भारत की पहल का स्वागत किया गया।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित