जयपुर , मई 16 -- राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष डॉ. वासुदेव देवनानी ने शिक्षा के साथ मानवीय मूल्यों को भी आत्मसात करने की जरुरत बताते हुए युवाओं का आव्हान किया है कि वे विज्ञान को आध्यात्म, तकनीक को संस्कृति और आधुनिकता को मानवता से जोड़ें।
श्री देवनानी शनिवार को राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित निर्वाण विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी दुनिया को नई दिशा देने की क्षमता रखती है। युवा पीढ़ी शिक्षा के साथ मानवीय मूल्यों को भी आत्मसात करेंगे तो आने वाले कल का परिदृश्य देश के लिए स्वर्णिम होगा।
उन्होंने कहा कि भारत ने विश्व को शून्य,आयुर्वेद, योग, ध्यान और आध्यात्म का विज्ञान दिया है। आज भारत अंतरिक्ष, डिजिटल तकनीक, चिकित्सा, रक्षा अनुसंधान और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में विश्व की अग्रणी शक्तियों में शामिल हो रहा है। यह परिवर्तन तकनीकी उपलब्धियों का नहीं, उस चेतना का प्रमाण है जो सदैव ज्ञान को मानव कल्याण से जोड़ती आई है।
श्री देवनानी ने कहा कि डिग्री केवल कागज मात्र नहीं है, यह मानव जीवन का पवित्र दायित्व है। निर्वाण विश्वविद्यालय ने जिस दर्शन को अपनाया है वह है "ज्ञानार्जन को जीवन-निर्माण से जोड़ना" यह अद्वितीय है। श्री देवनानी ने कहा कि आरोग्य संस्कृति विकसित करें और भारत को स्वास्थ्य गुरु बनाएं।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सम्बन्धी शिक्षा में नवाचार, अनुसंधान और मानवीय मूल्यों का संगम राजस्थान की मिट्टी से उपजा है, जिसका प्रभाव पूरे विश्व पर आयेगा। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि अपने जीवन को इतना ऊंचा बनाइए कि आपकी सफलता केवल आपका परिचय न बने, बल्कि भारत की आत्मा का परिचय बने।
इस अवसर पर गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म ने कहा कि प्राचीन काल में भारतीय विश्वविद्यालयों में विदेशी लोग अध्ययन के लिए आते थे। आज जरूरत हमें उसी मूल में लौटने की है। ऐसे संस्थान बनें कि अन्य देशों के लोग भारतीय संस्कृति, भारतीय दर्शन और अध्यात्म को पढ़ने और समझने के लिए वापस भारत आए। उन्होंने शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार पर विशेष जोर दिया।
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