जयपुर , फरवरी 17 -- केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विद्यार्थियों को रोजगार खोजने वाले नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाले बनने की प्रेरणा देते हुए कहा है कि शिक्षा केवल प्रमाण-पत्रों तक सीमित न रहकर किसानों एवं कृषि क्षेत्र के जीवन में वास्तविक परिवर्तन लाने का माध्यम बननी चाहिए।
श्री चौहान मंगलवार को जयपुर स्थित चौधरी चरण सिंह नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चरल मार्केटिंग (सीसीएस-एनआईएएम) के पांचवे दीक्षांत समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि यह केवल दीक्षांत समारोह नहीं, बल्कि "आशीर्वाद, उत्तरदायित्व और नए आरंभ" का अवसर है। उन्होंने कहा कि भारत ने उत्पादन एवं उत्पादकता की चुनौतियों को पार करते हुए वैश्विक खाद्य भंडार के रूप में पहचान बनाई है लेकिन अब किसानों की आय स्थिरता, बाजार अस्थिरता, आपूर्ति श्रृंखला सुदृढ़ीकरण, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण, ब्रांडिंग एवं निर्यात विस्तार पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
उन्होंने यह भी घोषणा की कि दीक्षांत समारोह अब प्रतिवर्ष आयोजित किया जाएगा तथा 200 शैय्या वाला छात्रावास इसी वर्ष पूर्ण कर लिया जाएगा। उन्होंने संस्थान से डिग्री प्राप्त करने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को स्वर्ण, रजत एवं कांस्य मेडल वितरित किए और संस्थान के कुल 191 छात्र-छात्राओं को उपाधियां प्रदान की और सभी को उनके उज्जवल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी।
श्री चौहान ने सीसीएस एनआईएएम, जयपुर में नव-निर्मित 200 क्षमता वाले बालक छात्रावास का शिलान्यास किया और संस्थान परिसर में हरित वातावरण को बढ़ावा देने के लिए पौधारोपण भी किया गया।
दीक्षांत समारोह में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भगीरथ चौधरी ने कहा कि भारत की संस्कृति, अर्थव्यवस्था और सभ्यता की जड़ें कृषि में निहित हैं तथा विकसित भारत 2047 का लक्ष्य तभी संभव है जब किसान समृद्ध एवं आत्मनिर्भर बनेंगे। उन्होंने अन्नदाता को सम्मान, न्याय एवं गरिमा प्रदान करने पर बल देते हुए कहा कि किसानों का कल्याण विकास नीतियों का केंद्र बिंदु होना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से किसानों के उत्थान के लिए अपने ज्ञान एवं कौशल को समर्पित करने और नवाचार एवं सेवा भावना के साथ कार्य करने का आह्वान किया।
इस अवसर पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालयके सचिव देवेश चतुर्वेदी, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय महानिदेशक एवं संयुक्त सचिव मुक्तानंद अग्रवाल और श्री कर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय जोबनेर के कुलगुरु पुष्पेंद्र सिंह चौहान पुष्पेंद्र सिंह चौहान मौजूद थे।
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