रायपुर , सितम्बर 18 -- पण्डित सुन्दरलाल शर्मा (मुक्त) विश्वविद्यालय छत्तीसगढ़, बिलासपुर ने शिक्षा, अनुसंधान और जनजातीय अध्ययन के क्षेत्र में संस्थागत सहयोग बढ़ाने के लिए महर्षि प्रबंधन एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमयूएमटी), बिलासपुर और जनजातीय अनुसंधान एवं ज्ञान केंद्र, नयी दिल्ली के साथ दो समझौता ज्ञापन (एमओयू) किए हैं।

विश्वविद्यालय की ओर से शुक्रवार को दी गई जानकारी के अनुसार एमयूएमटी के साथ हुए समझौते के तहत दोनों संस्थान अकादमिक गतिविधियों, अनुसंधान, प्रशिक्षण, नवाचार, विस्तार और संस्थागत विकास के क्षेत्र में सहयोग करेंगे। इसके अंतर्गत संयुक्त संगोष्ठी, कार्यशाला, व्याख्यान, अंतर्विषयी अध्ययन और पाठ्यचर्या से संबंधित गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा।

दोनों संस्थान एमओओसी, मुक्त शैक्षिक संसाधन (ओईआर), डिजिटल एवं स्व-अध्ययन सामग्री और तकनीक आधारित शिक्षण संसाधनों के विकास में भी सहयोग कर सकेंगे। इसके अलावा संयुक्त अनुसंधान, सर्वेक्षण, क्षेत्र अध्ययन, प्रायोजित शोध, परामर्श और संयुक्त प्रकाशन को प्रोत्साहित किया जाएगा।

समझौते के तहत विद्यार्थियों के लिए इंटर्नशिप, परियोजना कार्य, क्षेत्रीय अनुभव, शैक्षिक भ्रमण, कौशल विकास, करियर मार्गदर्शन और उद्यमिता से जुड़े अवसर विकसित करने पर भी काम किया जाएगा।

जनजातीय अनुसंधान एवं ज्ञान केंद्र, नई दिल्ली के साथ हुए एमओयू में जनजातीय मुद्दों और अनुसूचित जनजातियों से जुड़े विषयों पर संयुक्त अध्ययन एवं शोध को प्रमुखता दी गई है। इसके तहत सम्मेलन, संगोष्ठी, प्रकाशन और ज्ञान-साझाकरण के माध्यम से जनजातीय समाज, संस्कृति, परंपरा और समसामयिक विषयों पर अकादमिक अध्ययन को आगे बढ़ाया जाएगा।

जनजातीय अनुसंधान एवं ज्ञान केंद्र रणनीति निर्माण, योजना और कार्य-रोडमैप तैयार करने में बौद्धिक सहयोग तथा आवश्यकता के अनुसार विशेषज्ञता उपलब्ध कराएगा। प्रस्तावित गतिविधियों के समन्वय और निगरानी के लिए दोनों पक्षों के एक-एक प्रतिनिधि की दो सदस्यीय संचालन समिति गठित करने का भी प्रावधान है।

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