नैनीताल , अप्रैल 04 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने वर्ष 2016 की शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में हुई अनियमितताओं पर कड़ी टिप्पणी करते हुए चयन प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं। अदालत ने पूछा कि जब अभ्यर्थियों को सीबीएसई और एनसीटीई द्वारा अपात्र घोषित किया गया था तो चयन समिति ने बिना योग्यता जांचे उनकी नियुक्ति की सिफारिश कैसे कर दी।

मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ ने शिक्षा विभाग के रवैये पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि विभाग बार-बार शपथ पत्र दाखिल कर अपने पुराने फैसलों को सही ठहराने की कोशिश कर रहा है, जो न्यायिक निर्देशों को विफल करने जैसा है।

यह मामला वर्ष 2016 की भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा है, जिसमें कई अपात्र अभ्यर्थियों की नियुक्ति कर दी गई थी, जबकि 11 योग्य अभ्यर्थी नियुक्ति से वंचित रह गए। इन अभ्यर्थियों ने विनय कुमार व अन्य के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट के देवेश शर्मा बनाम भारत संघ मामला का हवाला देते हुए याचिकाकर्ताओं को बीएड डिग्री के आधार पर अपात्र बताया गया। हालांकि याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने इसका विरोध करते हुए कहा कि राज्य पहले ही इन अभ्यर्थियों को 2016 के विज्ञापन के अनुसार पात्र मान चुका है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित