पटना , अप्रैल 09 -- बिहार जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पर हमला करते हुए गुरुवार को कहा कि शिक्षक भर्ती को लेकर वे भ्रम फैलाकर झूठा क्रेडिट लेने का प्रयास कर रहे हैं,जबकि सच्चाई यह है कि राष्ट्रीय जनता दल (राजद)के कोटे से तत्कालीन शिक्षा मंत्री महीनों तक अपने विभागीय दफ्तर से नदारद रहे और भर्ती प्रक्रिया में लगातार अड़चनें पैदा करने की कोशिश की गई। जदयू प्रदेश अध्यक्ष ने आज बयान जारी कर कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति के कारण ही शिक्षा विभाग में लाखों शिक्षकों की बहाली संभव हो सकी और युवाओं को बड़े पैमाने पर सरकारी नौकरियां दी गईं।
श्री कुशवाहा ने कहा कि तेजस्वी यादव को यह बताना चाहिए कि उनके माता-पिता के 15 वर्षों के शासनकाल में कितने शिक्षकों की बहाली हुई थी। उन्होंने कहा कि सच्चाई यह है कि उस दौर में शिक्षकों की नियुक्ति नाममात्र की रही और राज्य में छात्र-शिक्षक अनुपात बेहद दयनीय स्थिति में पहुंच गया था। उस समय जहां 65 विद्यार्थियों पर मात्र एक शिक्षक उपलब्ध था, वहीं वर्तमान में यह अनुपात घटकर लगभग 35 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक हो गया है।
श्री कुशवाहा ने कहा कि नीतीश सरकार ने शिक्षक बहाली के क्षेत्र में नया कीर्तिमान स्थापित किया, जिसकी चर्चा देशभर में होती है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 में बिहार लोक सेवा आयोग के माध्यम से 2,38,744 शिक्षकों की नियुक्ति की गई, वहीं वर्ष 2025 में 36,947 प्रधान शिक्षक एवं 5,971 प्रधानाध्यापकों की बहाली की गई। इसके अतिरिक्त वर्ष 2006 में स्थानीय निकायों से नियोजित 3,68,000 शिक्षकों को सक्षमता परीक्षा के माध्यम से नियमित करने की प्रक्रिया भी चल रही है। आज बिहार में सरकारी शिक्षकों की संख्या लगभग 6 लाख के करीब पहुंच चुकी है।
जदयू प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि श्री कुमार के नेतृत्व में शिक्षा के क्षेत्र में हुए व्यापक सुधारों का ही परिणाम है कि बिहार की साक्षरता दर अब लगभग 80 प्रतिशत तक पहुंच गई है। विशेष रूप से महिलाओं की साक्षरता दर, जो वर्ष 2001 में मात्र 33.57 प्रतिशत थी, अब बढ़कर 73.91 प्रतिशत हो गई है।
श्री कुशवाहा ने कहा कि तेजस्वी यादव को जनता को गुमराह करने के बजाय अपने परिवार के शासनकाल की सच्चाई स्वीकार करनी चाहिए और यह बताना चाहिए कि उस समय शिक्षा व्यवस्था क्यों बदहाल थी।
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