चमोली , जुलाई 17 -- उत्तराखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ ने जनपद चमोली की ओर से शुक्रवार को शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से छूट देने और पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) को बहाल करने की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट परिसर में धरना प्रदर्शन किया और प्रधानमंत्री और केंद्रीय शिक्षा मंत्री को संबोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी चमोली के माध्यम से भेजा।

ज्ञापन में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) 2009 के लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता से विधिक रूप से छूट देने तथा पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) की बहाली की मांग की गई है।

संघ के जिला अध्यक्ष श्री दिगम्बर सिंह नेगी, जिला कोषाध्यक्ष श्री प्रेम सिंह फरस्वाण और जिला मंत्री श्री मुकेश सिंह नेगी के हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन में कहा गया है कि राज्य की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था शिक्षकों की सेवा सुरक्षा, सम्मान, अर्जित अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा पर आधारित है। ऐसे में लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए सरकार को सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए।

ज्ञापन में कहा गया है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 लागू होने से पूर्व तत्कालीन नियमों के तहत नियुक्त शिक्षकों ने वर्षों तक सफलतापूर्वक शिक्षण कार्य किया है। ऐसे शिक्षकों पर बाद में लागू की गई टीईटी की अनिवार्यता लागू करना प्राकृतिक न्याय और उनके अर्जित सेवा अधिकारों के अनुरूप नहीं है। संघ ने मांग की है कि यदि सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के कारण टीईटी अनिवार्य हो गई है तो सरकार आवश्यक विधायी संशोधन कर आरटीई लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से विधिवत छूट प्रदान करे।

इसके अलावा संघ ने ओपीएस को पुनः लागू करने की भी मांग उठाई। ज्ञापन में कहा गया है कि वर्तमान एनपीएस/यूपीएस व्यवस्था कर्मचारियों को ओपीएस जैसी सुनिश्चित सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध नहीं कराती। इसलिए शिक्षकों और सभी सरकारी कर्मचारियों के हित में पुरानी पेंशन योजना को बहाल किया जाना चाहिए। संघ ने विश्वास जताया कि केंद्र सरकार शिक्षकों की इन न्यायोचित मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेगी।

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